वाराणसी, जेएनएन।  डाकिया ऐसा व्यक्ति जो रिश्तों को जोड़ता है। अपनों तक उनका संदेश, स्नेह बंद लिफाफे में सहेजकर पहुंचाता है। धूप, बारिश, ठंडी सबसे बेपरवाह वह बस कडिय़ों से कडियां जोड़ता है। वर्तमान में कोरियर आदि की सुविधा के बाद डाक विभाग के प्रति लोगों ने कुछ दूरी बनानी शुरू की थी मगर लॉक डाउन में जिस प्रकार डाक विभाग व डाकियों की मजबूत भूमिका दिखी वह सराहनीय था। जब बैंक बंद थे, कोरियर सेवाएं ठप थीं तो डाक विभाग लोगों के कंधे से कंधा मिलाकर चला। लॉकडाउन में भी डाक विभाग से मनीआर्डर, एईपीएस यानी आधार इनबिल्ड पेमेंट सिस्टम, रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट के जरिए दवाएं आदि जनता तक पहुंचाई गईं।

लोकल सेवाएं चालू थीं। खास बात यह कि इस दौरान जब लोग घर से बाहर नहीं निकल पा रहे थे तो उनके घर तक डाक विभाग ने पैसा भी पहुंचाया जिसमें उनके पोस्टमैनों की महत्वपूर्ण भूमिका नजर आई। वहीं इस विभाग में महिलाएं भी हैं जिन्होंने जन सेवा में हर दिन कार्यालय में अपनी  न सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराई बल्कि अपनी मजबूत सोच और इच्छा शक्ति का भी परिचय दिया। इस समय डाक विभाग में बाबा दरबार के प्रसाद को जनता तक पहुंचाने का कार्य शुरू हो चुका है। वहीं गंगाजल, एलईडी टयूब व बल्ब भी लोग यहां से ले रहे हैं। वहीं फिलेटली विभाग में तरह तरह के स्टांप भी लोगों को लुभा रहे हैं। वहीं जनता को कोरोना वायरस से बचाने के लिए विभाग द्वारा अपने यहां के काउंटरों से सैनिटाइजर सहित जरूरी चीजें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। पोस्टमैनों व डाक विभाग की महिला कर्मचारियों ने अपने अनुभव को साझा किया।

लोगों का स्नेह पाकर बड़ा अच्छा लगा

राजमंदिर के  पोस्टमैन अशोक कुमार चौबे ने बताया कि गंगा किनारे व पक्के महाल के क्षेत्रों में लॉक डाउन के समय जब पत्र, मनीआर्डर या एईपीएस का पैसा देने जाता था तो सन्नाटा देखकर भय सा लगता था। मगर सुरक्षा के उपाय करते हुए अपने कार्य को पूरा करता था। इस दौरान जिन लोगों तक पत्र आदि पहुंचाता वो लोग संभलकर जाने को कहते। मुझसे कुछ बातें करते और शहर का हाल लेते थे। कई लोगों ने तो कहा आपके आने से संदेश भी मिला और दो टूक बात करके थोड़ा अच्छा भी लगा। इसलिए उस दौरान दो कर्तव्य हो गए थे जनता तक उनका संदेश पहुंचाना और थोड़ा धीरज देना। लगभग 22 साल से इस विभाग में कार्य कर रहा हूं मगर लोगों का ये स्नेह पाकर बड़ा अच्छा लगा। डाकिया सिर्फ डाक ही नहीं बल्कि धीरज के दो बोल भी लाता है ये जनता ने हमसे कहा।

ताकत और आत्मबल होता है मजबूत

सार्टर पोस्टमैन दिनकर पाठक का कहना है कि लॉकडाउन में डाक विभाग की अहमियत लोगों को समझ आई। हम लोग पत्रों की छटाई का काम करते थे।घर वाले डरे थे लेकिन ये बात मन में हमेशा थी कि एक पुलिस, डाक्टर और दूसरे हम लोग इस वक्त कोरोना से सीधे लोहा ले रहे हैं तो एक योद्धा का अहसास होता था।नीचीबाग पोस्ट आफिस के पोस्टमास्टर सी अनीता ने बताया कि कर्तव्य एक ऐसी चीज होती है अगर जिसे ईमानदारी से किया जाए तो ताकत और आत्मबल मजबूत होता है। कोरोना काल में अकेली बीएचयू से अपनी स्कूटी से कार्यालय तक आने में जरा भी भय नहीं लगा। हालांकि कोरोना से बचाव के लिए सारे इंतजाम किए थे। एक बार मैं सड़क पर गिरते गिरते बची थी केवल तब ये लगा कि अगर एक्सीडेंट हो जाता तो कौन घर पहुंचाता। लगभग 22 साल से बनारस में हूं मगर ऐसी सूनी सड़कें कभी नहीं देखी थीं। बस सड़क को लेकर यही एक बार डर लगा था। वैसे विभाग ने महिलाओं के लिए घर से लाने ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था कर दी थी।

डाक विभाग ने अपनी मजबूत भूमिका निभाई

पोस्टल असिस्टेंट भाग्य रुपा का कहना है कि बिहार की रहने वाली हूं। यहां दो साल से नौकरी कर रही हूं। घर वालों को बहुत चिंता होती थी। मगर विभाग से आने जाने के लिए वाहन मिल जाने से राहत थी। हम लोग समय से पूर्व ही कार्यालय पहुंच जाते थे और काम करते थे। डाक विभाग ने अपनी मजबूत भूमिका निभाई है यही वजह है कि लोग इसकी ओर बढ़ रहे हैं। जब बैंक बंद थे तो डाकविभाग लोगों के घर तक पहुंचा था।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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