वाराणसी, इंटरनेट डेस्‍क। पूर्वांचल सहित समूचे उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तर भारत में मानसून के तय समय से पूर्व आने की उम्‍मीदें अब कमजोर पड़ती जा रही हैं। बीते तीन दिनों से मानसून अंडमान निकोबार द्वीप समूह में ही बरकरार है और मानसून की गति स्थिर होने की वजह से तय समय से लगभग सप्‍ताह भर पूर्व मानसून के आगमन के बाद भी मानसूनी सक्रियता मानो ठिठक गई है। मौसम विभाग की ओर से जारी मानसूनी सक्रियता की रिपोर्ट में मानसून को लेकर चिंता का माहौल नजर आने लगा है। माना जा रहा है कि असानी च‍क्रवात की वजह से मानसून इसके पीछे जल्‍द आ तो गया लेकिन तेजी शीघ्र खो देने की वजह से मानसून की गति सुस्‍त पड़ गई है।

पूर्व में आइएमडी की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार 15 मई को देश में मानसूनी सक्रियता की उम्‍मीद जताई गई थी। इस लिहाज से तय समय के आसपास ही मानसून ने 16 मई को अंडमान‍ निकोबार द्वीप समूह में दस्‍तक दी और उसी रेखा में 17 मई को भी मानसूनी सक्रियता बनी रही। वहीं इसके बाद मानसून ने थोड़ी गति तो पकड़ी लेकिन 18-20 मई तक मानसून अंडमान निकोबार द्वीप समूह में तीन दिनों तक एक ही रेखा पर सक्रिय रहा। इसकी वजह से पांच दिनों में मानसून ने दो दिनों तक ही मानसून की रेखा उत्‍तर की ओर आगे बढ़ी है। ऐसे में मानसून के सुस्‍त पड़ने की उम्‍मीद बढ़ी है। 

मानसून की सुस्‍ती का आलम बरकरार रहा तो केरल और तमिलनाडु में मानसून जून के पहले सप्‍ताह में ही पहुंच सकेगा। हालांकि, इस बात के समर्थन में कोई रिपोर्ट उपलब्‍ध नहीं है लेकिन समुद्र में हालात बेहतर हुए तो सप्‍ताह भर में मानसून की रेखाएं समुद्र तटीय इलाकों में भी सक्रियता का संदेश दे सकती हैं। वहीं अब अधिकतम 30 दिनों में मानसून उत्‍तर प्रदेश में दस्‍तक देने की स्थिति में आने की उम्‍मीद है। माना जा रहा है कि 18 से 20 जून तक मानसून सोनभद्र के रास्‍ते उत्‍तर प्रदेश में दस्‍तक दे देगा। इसके बाद समूचे उत्‍तर प्रदेश में तीस जून तक मानसूनी सक्रियता बनी रहने के बीच जुलाई के पहले सप्‍ताह में मानसून नई दिल्‍ली में दस्‍तक दे सकता है। जबकि 25 जून के आसपास लखनऊ में मानसून सक्रिय हो जाएगा। 

Edited By: Abhishek Sharma