वाराणसी [रत्नाकर दीक्षित]। महामना की बगिया से गुरुवार को एक और राष्ट्रीय संदेश देश की फिजां में तैर गया। अहसास करा दिया कि अब भारत के उपेक्षित व अदृश्य नायकों को विस्मृत नहीं किया जा सकता। उन वीरों को भी वर्तमान व भावी पीढ़ी पढ़ेगी जो अब तक इतिहास के कुछ ही पन्नों तक सिमटे हैं या उन्हें जबरन सिमटा दिया गया है। हम अपने देश के उन गौरवशाली कालखंड को भी जानेंगे जिससे अब तक हम अछूते थे। जानेंगे ही नहीं बल्कि पढ़ेंगे और गर्व भी महसूस करेंगे। जी हां, कुछ ऐसा ही संदेश दे गए गृहमंत्री अमित शाह।

वह गुरुवार को काशी ¨हदू विश्वविद्यालय स्थित स्वतंत्रता दिवस में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। गृहमंत्री उन तथ्यों को सामने ला रहे थे जिससे अमूमन लोग अपरचित थे या जानते भी थे तो उसे अभी तक तवज्जो नहीं दी गई थी। भारत अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित संगोष्ठी में उनके एक-एक वाक्य वहां बैठे लोगों की जेहन में उतरते जा रहे थे। उनकी वाणी में दृढ़ता थी। उनका एक संदेश यह भी था कि अंग्रेज व वामपंथी इतिहासकारों को कोसने की जरूरत नहीं है, बल्कि सही व सटीक गौरवशाली इतिहास को जनता के सामने लाने की है। अलग-अलग कालखंड के नायक संगोष्ठी का आशय यह कि अलग-अलग दौर में भारत को अखंड बनाए रखने में कई नायकों का उदय हुआ।

उनमें कुछ महानायक थे। उसी महानायक में शुमार हैं गुप्त वंश के वीर स्कंदगुप्त विक्रमादित्य। लेकिन, ऐसे नायकों व वीरों को अंग्रेज व वामपंथी इतिहासकार अपने-अपने ढंग उनके व्यक्तित्व व कृतित्व और उनकी राजसत्ता को जनता के समक्ष रखे हैं। कुछ ने तो तवज्जो ही नहीं दी और कुछ ने नायकों के पराक्रम व प्रताप को कमतर आंका। इतना ही नहीं बल्कि कुछ नायकों को तो विस्मृत तक कर दिया गया। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। विदेशी आक्रांताओं से बचाया संगोष्ठी में इस तथ्य पर विशेष जोर था कि हम आखिर उन नायकों या महानायकों को कैसे विस्मृत कर सकते हैं जिन्होंने अपने पराक्रम से विदेशी आक्रांताओं को देश की सीमा से भगाया ही नहीं बल्कि उन्हें बुरी तरह से पराजित भी किया।

उन्हीं वीरों में एक हैं गुप्तकाल के सम्राट स्कंदगुप्त विक्रमादित्य। हूणों को घुटने टेक देने को मजबूर कर देने वाले गुप्त वंश के महानायक स्कंदगुप्त को आखिर कमतर क्यों आंका गया। य वा राष्ट्रहित को रखें सर्वोपरि संगोष्ठी के समन्वयक प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी भी मानते हैं कि ऐसे नायकों को सामने लाया जाए जो देश के लिए पूरी तरह समर्पित रहे। संगोष्ठी का उद्देश्य यह है कि वर्तमान व भावी पीढ़ी महानायकों के आचरण को अपनाएं और देशहित में कुछ करें।

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