आबादी के हिसाब से शहर का विकास होना चाहिए। मसलन, अलग शहर बसाना या योजनाओं से लाभान्वित कराना, कई शहरों में यह किया भी गया है, जहां लोगों को खूब सुविधाएं भी मिल रही हैं। दो दशक में रिंग रोड का काम पूरा नहीं हो सका। रिंग रोड का काम पूरा हो गया होता तो शहरी सीमा का विकास खुद हो जाएगा। रिंग रोड के बाहर भी कारखाना, फैक्ट्री और उद्योग लगाया जा सकता है, इससे आसपास के गांवों का भी विकास हो सकता है।

शहरों का मोह छोड़ दें तो बाहर सस्ते फ्लैट और जमीनें आसानी से मिल सकती हैं। शहर में सर्किल रेट से कई गुना महंगी जमीनें है। बढ़ती जनसंख्या के सापेक्ष बहुत कुछ करने की गुंजाइश है, साथ ही मूलभूत सुविधाओं पर जोर देने की भी जरूरत है।

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17 हजार करोड़ के चल रहे विकास कार्य
प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण बनारस में करीब 17 हजार करोड़ के विकास कार्य हो रहे हैं। ज्या्दातर लोग शहरी सीमा के अंदर रहना पसंद कर रहे हैं, लेकिन जगह है नहीं जो है वह महंगी मिल रही है। गांव को शहर से जोड़ने के लिए विभिन्न सरकारों ने योजनाएं बनाई।

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सरकारी और प्राइवेट बसें चलाने, सड़क बनाने आदि घोषणाएं की, लेकिन कैसे लोग जुड़ेंगे, इसकी सही ढंग से योजनाएं नहीं बनाई। विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद ने योजनाओं को मूर्तरूप देने की कोशिश की होती तो लोग फ्लैट और जमीन खरीदकर रहना ज्यादा पसंद करते।

बिल्डर्स से अपेक्षा की, सहयोग नहीं
सभी सरकारों ने बिल्डरों से विकास की अपेक्षा की। सरकार की बिल्डरों संग हुई बैठक में फ्री होल्ड या सस्ते रेट पर जमीन उपलब्ध कराने की बात रखी गई जिससे उसे विकसित कर आम लोगों को सस्ते में उपलब्ध कराया जाए। किसी भी टैक्स में छूट नहीं दी। बढ़ते जमीन की कीमतों संग विभिन्न टैक्सों के पड़े भार पर बिल्डरों ने फ्लैट की कीमत बढ़ाई।

जोनल प्लान बनाने की जरूरत
नगर निगम और विकास प्राधिकरण में अधिकारियों के कामों का बंटवारा करने के लिए जोन बनाएं हैं। उसी प्रकार विकास के लिए जोनल प्लान बनाकर विकास किया जाए। एक साथ पूरे शहर का विकास करने में अधिक बजट की जरूरत पड़ेगी। जोनलवार काम करने में आसानी भी होगी।

सड़कों का चौड़ीकरण जरूरी
आबादी और शहर के महत्व को देखते हुए सड़कों का चौड़ीकरण जरूरी है। घंटों जाम में फंसकर लोग परेशान होते हैं। वाहनों के धुएं से हवा प्रदूषित हो रही है। अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने की जरूरत है।

वाहन पार्किंग बनाने की जरूरत
वाहन पार्किंग बनाकर शहरवासियों को जाम से राहत दिलाई जा सकती है। वाहन पार्किंग नहीं होने से लोग अपने वाहनों को सड़क पर खड़ी कर देते हैं। बेतरतीब वाहनों के खड़े होने से जाम की स्थिति पैदा होती है।

कहने को महानगर, बिजली संकट बहुत
महानगर होने के बाद भी शहर में बिजली व्यवस्था ठीक नहीं है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी पहले जैसे हालात हैं। शहर के विकास के लिए पहले बिजली व्यवस्था दुरुस्त होना जरूरी है। बिजली से कल-कारखाने सही ढंग से संचालित हो सके।

प्लानिंग से हो सड़कों का काम
करोड़ों रुपये खर्च करके सड़कें बनाई जाती हैं, लेकिन विकास के नाम पर मनमाने तरीके से उसे खोदकर छोड़ दिया जाता है। सड़क बनाने से पहले सुव्यवस्थित योजना बननी चाहिए। वहीं, यात्रियों की सुविधा के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। यही कारण है कि लोग निजी वाहनों से ज्यादा पसंद करते हैं।

नगर निगम को करना होगा मंथन
शहर में बिगड़ती सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम ने निजी एजेंसियों का सहारा लिया, लेकिन इसका लाभ लोगों को मिल नहीं पा रहा है। शहर की सड़कों पर गंदगी के साथ कूड़ा डंप पड़ा है, जिससे राहगीरों का गुजरना मुश्किल हो जाता है। बिना नगर निगम के स्वच्छता की बात करना बेइमानी होगी। नाले और नालियों की समय से सफाई नहीं होने से गंदगी रहती है, पेयजल व्यवस्था भी सही नहीं है। लोगों के घरों में दूषित पेयजल आपूर्ति हो रही है। 

- दीपक बहल, डायरेक्टर, ड्रीमलैंड होल्डिंग्स लिमिटेड

By Nandlal Sharma