काशी सर्वविद्या की राजधानी रही है। यहां देश ही नहीं अपितु विदेशों से भी विद्यार्थी अध्ययन करने प्राचीन काल से ही आते रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में बनारस एक बड़ा हब बनकर उभरा है। यहां आधुनिक शिक्षा की पहचान रखने वाला काशी हिंदू विश्वविद्यालय जहां देश-दुनिया में नाम रोशन कर रहा है, वहीं प्राच्य विद्या में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का दुनिया में कोई जोड़ नहीं है।

मेडिकल व तकनीकी शिक्षा में भी काशी प्रगति कर रही है। हालांकि माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालयों में संसाधन का अभाव अभी भी बना हुआ है। स्मार्ट क्लास व ई-पाठशाला तो दूर 50 विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन तक नहीं है। नतीजा यह कि निजी संस्थानों ने तेजी से काशी में पांव पसारा है।

उच्च शिक्षा में यहां बीएचयू के अलावा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, सारनाथ में केंद्रीय तिब्बती संस्थान (डीम्डच विश्वविद्यालय) और जामिया सल्फिया (डीम्ड विश्वविद्यालय) भी मौजूद है। शिक्षा क्षेत्र में काशी पूर्वांचल ही नहीं बिहार सहित कई राज्यों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

आज भी देश के तमाम युवा बीएचयू जैसी उच्च संस्था में दाखिले के लिए लालायित रहते हैं। विगत कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में कई ऐसे आयाम जुड़े हैं जिससे इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को बिना दिल्ली या अमेरिका जाए ही तमाम शिक्षा मिल जा रही है। 

 

काशी हिंदू विश्वविद्यालय

बीएचयू अन्य विश्वविद्यालयों से अनूठा और अलग है। एक ओर जहां अन्य विश्वविद्यालय विभिन्न सरकारी प्रयासों की उपज है वहीं दूसरी ओर काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना देश के पराधीन काल में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने देशवासियों के सहयोग से राष्ट्र संकल्प के रूप में राष्ट्र निर्माण के लिए की थी।

विश्वविद्यालय की स्थापना 1916 में की गई, इसने देश के लगभग सभी क्षेत्रों में अपना अप्रतिम योगदान दिया है। यहां के छात्रों ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपना और विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया व उच्च स्तर को प्राप्त किया है। आज की पीढ़ी की ज्ञान धरा को तेवर देने के लिए इस विशाल परिसर में सबकुछ मौजूद हें।

बीएचयू का स्वरूप

1365 : एकड़ में मुख्य परिसर

2740 : एकड़ में दक्षिणी परिसर (मीरजापुर में)

1900 : से अधिक शिक्षक

32000 : छात्र-छात्राएं

4000 : शोधछात्र

05 : संस्थान

16 : संकाय

134 : विभाग

15 : सेंटर

02 : अंतर विषयक स्कूल

01 : महिला महाविद्यालय

04 : संबद्ध कालेज

महात्मा- गांधी काशी विद्यापीठ का स्वरूप

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 10 फरवरी 1921 में महात्मा गांधी ने काशी विद्यापीठ की आधारशिला रखी थी। विद्यापीठ की पहचान मुख्य रूप से एमएसडब्ल्यू से रही है। हालांकि यहां पर कला, विज्ञान व वाणिज्य की भी पढ़ाई होती है। करीब आठ हजार विद्यार्थी पंजीकृत है। बावजूद इसके विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय में संसाधनों का घोर अभाव बना हुआ है। मानक के अनुसार लैब तक नहीं है। परिसर में वाई-फाई की व्यवस्था है, लेकिन स्मार्ट क्लास में पीछे हैं।

कुछ विभागों में स्मार्ट क्लास बनाए गए हैं, लेकिन पढ़ाई परंपरागत तरीके से ही चल रही है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 34 पद रिक्त चल रहे है। इसके चलते भी पठन-पाठन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। हालांकि यहां पर पहले से काफी सुधार आया है।

45 : एकड़ का है मुख्य परिसर

47 : एकड़ का है गंगापुर परिसर

02 : संस्थान

09 : संकाय

29 : विभाग

180 : शिक्षक

8000 : विद्यार्थी

419 : संबद्ध कालेज

संस्कृत विश्वंविद्यालय

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना 1791 में संस्कृत कालेज के रूप में हुई थी। वर्तमान में इसकी शाखाएं पूरे देश में है। विवि से पूरे देश में 591 कालेज संबद्ध है। विश्वविद्यालय में मुख्य रूप से साहित्य, वेद, वेदांत, धर्मशास्त्र, ज्योतिष, व्याकरण, पुराणेतिहास, न्याय, सांख्य योग तंत्रागम, मीमांसा सहित अन्य परपरांगत विषयों की पढ़ाई होती है। हालांकि विवि में अभी भी आर्थिक संसाधनों का घोर अभाव बना हुआ है। छात्र संख्या भी काफी कम है।

67 : एकड़ में परिसर

112 : शिक्षकों के स्वीकृत पद

2000 : छात्र-छात्राएं

150 : शोधछात्र

02 : संस्थान

05 : संकाय

22 : विभाग

591 : संबद्ध कालेज

माध्यमिक विद्यालय

397 : कुल विद्यालय है जिले में

25 : राजकीय बालिका विद्यालय

05 : राजकीय बालक विद्यालय

81 : अशासकीय बालिका विद्यालय

25 : अशासकीय बालक विद्यालय

194 : वित्तविहीन बालक विद्यालय

67 : वित्तविहीन बालिका विद्यालय

04 : लाख है विद्यार्थी हैं (कक्षा 6 से 12)

2876 : शिक्षकों के स्वीकृत पद

1905 : शिक्षक कार्यरत

971 : शिक्षकों का पद रिक्त

सीबीएसई

06 : सरकारी विद्यालय

179 : निजी विद्यालय

आइसीएसई

11 : विद्यालय

प्राथमिक स्कूलों की स्थिति

1013 : प्राइमरी विद्यालय

354 : पूर्व माध्यमिक विद्यालय

06 : कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय

03 : आश्रम पद्धति के विद्यालय

75 : अनुदानित विद्यालय

20 : मदरसा

4345 : अध्यापक प्राथमिक विद्यालय में

1575 : अध्यापक उच्च प्रा. वि. में

पंजीकृत छात्रों की संख्या

145000 : छात्र प्राइमरी विद्यालयों में

47000 : छात्र पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में

600 : छात्र कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में

499 : आश्रम पद्धति के विद्यालय में 

20000 : अनुदानित विद्यालय में

By Nandlal Sharma