जागरण संवाददाता, वाराणसी। तकनीकी के इस दौर में देश तेजी से विकास कर रहा है। इसका असर नगर में ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिख रहा है। प्राय: हर व्यक्ति के हाथ में अब स्मार्ट फोन आ गया है। बच्चे लगायत वरिष्ठ नागरिक तक इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। पर अफसोस यह है कि हम अपनी सोच को स्मार्ट नहीं बना पा रहे हैं। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए हमें अपनी सोच को स्मार्ट बनने की जरूरत है।

‘माय सिटी माय प्राइड’ के तहत नदेसर स्थित 'दैनिक जागरण’ के कार्यालय में शनिवार को आयोजित राउंड टेबल कांफ्रेंस का यह निष्कर्ष रहा। प्रबुद्धजनों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रा, इकोनॉमी व सेफ्टी पांचों पिलर खुलकर अपनी बातें रखी। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयास से नगर विकास संभव नहीं हैं। हमें खुद भी पहल करनी होगी, हम अधिकारों को लेकर अधिक सचेत रहते हैं लेकिन कर्तव्य की बातें आती हैं तो हम पीछे के पंक्ति में खड़े हो जाते हैं। हमें अपनी सोच बदलनी होगी। एक पुरानी कहावत हैं कि 'हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा’ के तर्ज पर पहले हमें बदलना होगा।

घर की भांति यह नगर भी हमारा है यह भाव हमें अपने अंदर विकसित करनी होगी। तभी हम नगर को स्वच्छ, सुंदर बना सकते हैं। शिक्षा के मामले में नगर पहले ही समृद्ध रहा है। अब प्राइमरी स्कूलों की स्थिति भी बदल रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। गंभीर रोगों का इलाज अब अपने नगर में हो रहा है। बावजूद सरकारी अस्पतालों में अभी बहुत कार्य करने की जरूरत है। संसाधन पहले से बढ़े हैं लोगों की आमदनी भी धीरे-धीरे बढ़ रही है। यहीं कारण है कि नगर में कारों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका अर्थ यह नहीं कि नगर विकसित व समृद्ध हो गया है। अब भी हम बहुत पीछे है। इस दिशा में हमें मिलजुल कर कार्य करना होगा। हम प्रयास कर भी रहे हैं। इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहा है लेकिन अब भी कमी बनी हुई हैं। ऐसे में हमें अपने नगर विकसित के लिए सार्थक प्रयास करने का संकल्प लेना होगा। अपने स्तर से हम लोग प्रयास भी करते रहेंगे।
नगर में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। वायु, जल, ध्वनि सहित तमाम प्रदूषणों के चलते लोगों में बीमारियां बढ़ रही है। ऐसे में जागरूकता बेहद जरूरी है। पर्यावरण ही नहीं विभिन्न बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक करना होगा। ताकि बीमारियां रोकी जा सकी। नगर के तमाम चिकित्सक अपने मरीजों को इलाज करने के साथ-साथ बीमारियों से बचने के लिए सलाह भी दे रहे हैं।
- डा. अनिल ओहरी, पूर्व सीएमएस, दीन दयाल उपाध्याय चिकित्सालय

 

नगर का तेजी से विकास हो रहा है। बदलाव नजर आ रहे हैं। पहली बार नगर निगम के कर्मचारियों ने रोड डिवाडर को पानी से साफ किया। ऐसे में हमें व अधिकारियों को भी अपनी सोच बदलनी होगी। नगर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। अधिकारियों को एसी चैंबर से बाहर निकलना होगा। वहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में पब्लिक व प्राइवेट सेक्टर को मिलकर काम करने की जरूरत है।
- सन्नी जौहरी

'विश्व की प्राचीन नगरों में से काशी एक है। काशी की सभ्यता व संस्कृति निराली है। शिक्षा, संगीत, बाजार के क्षेत्र में भी काशी की भूमिका अग्रणी है। इस शहर का पौराणिक महत्व है। शहर के विकास में पौराणिक महत्वों को भी ध्यान देना होगा। विकास के साथ-साथ प्राचीन परम्पराओं व मान्यताओं को भी संरक्षित करने की आवश्यकता है। आयुर्वेद के क्षेत्र में बहुत काम करने की जरूरत है।
- श्रीनारायण खेमका, कोषाध्यक्ष, वाराणसी विकास समिति

हम दूसरे देशों से हमेशा तुलना करते रहते हैं लेकिन कभी अपने नगर की तुलना दूसरे नगर से नहीं करते हैं। नगर के स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा की भावना से काम करना होगा। साथ ही लंबे समय को ध्यान में रखकर योजना बनानी होगी। कारण जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में बढ़ती हुई जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए पुख्ता प्लान करना होगा। उदाहरण स्वरूप सड़कों की लंबाई व चौड़ाई एक बार में ही तय करनी होगी। खास तौर पर यातायात व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की जरूरत है ताकि लोग निजी वाहनों का प्रयोग कम से कम करें।
- प्रो. अनिल कुमार, काशी विद्यापीठ

स्वास्थ्य के क्षेत्र में बनारस में काफी काम हुआ है। अब गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज बनारस में संभव है। खास बात यह है कि सरकारी सेक्टर के अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ी है। अब इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं हैं। हालांकि चिकित्सकों की कमी अब भी बनी हुई है। चिकित्सकों की कमी पूरी देश में है। वहीं ब्लाक स्तर पर अस्पतालों की स्थिति अब भी ठीक नहीं है। इसे ठीक करने की जरूरत है।
- डा. कार्तिकेय, प्रसिद्ध चिकित्सक व उपाध्‍यक्ष आइएमए

नगर में यदि हम बदलाव देखना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें सुधरना होगा। हम बदलेगी तभी नगर भी बदलेगा। नगर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के लिए हमें अपनी परंपरागत आदतों को छोडऩा होगा। साथ ही गरीब व्यक्तियों के विकास के बारे में भी विचार करने की आवश्यकता है।
- अब्दुल्ला खालिद,सामाजिक कार्यकर्ता

नगर में आज भी जगह-जगह गंदगी पसरी हुई है। ऐसे में सफाई को लेकर अभी बहुत काम करने की आवश्यकता है। साथ ही हमें भी सफाई पर ध्यान देना होगा।
- सुजीत कुमार गुप्त, सामाजिक कार्यकर्ता

नगर के कुछ भागों में नियमित सफाई हो रही है। वहीं तमाम कालोनियों व मोहल्लों में नियमित कूड़ा नहीं उठ रहा है। इसके चलते बीमारियां फैल रही है। नगर निगम को अपने दायित्वों को और बेहतर करने की जरूरत है। वही हमें भी अपने दायित्वों के बारे में समझना होगा।
- शैलेश कुमार सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता

 

By Gaurav Tiwari