सोनभद्र, जेएनएन। घोरावल के मूर्तिया गांव में बुधवार की दोपहर में दो पक्षों में जमीनी रंजिश को लेकर हुए आपसी विवाद में जमकर खूनी संघर्ष हुआ। वारदात में दस लोगों की हत्‍या कर दी गई और दो दर्जन से अधिक लोग वारदात में घायल हैं जिनमें दो लोगों की हालत अधिक गंभीर बनी हुई है। स्‍थानीय लोगों के मुताबिक विवाद के दौरान आपस में असलहे से फायरिंग और गड़ासा चलने से कई लोग गंभीर रुप से घायल भी हो गए। इस आपसी विवाद में कई घरों के चिराग बुझ गए तो कई की मांग सूनी हो गई। इस लोमहर्षक वारदात के बाद से ही गांव में मातम पसरा हुआ है। 

आठ राइफलों से आधे घंटे तक तड़तड़ाती रहीं गोलियां

घोरावल कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पंचायत मूर्तिया के उभ्भा में ग्राम प्रधान जमीन पर कब्जा करने के लिए पूरी तैयारी से आया था। ट्रैक्टर पर सवार सैकड़ों लोगों के हाथों में लाठी-डंडे, गड़ासा था। वहीं बोलेरो में सवार लोगों के पास आठ से अधिक राइफलें थीं। ग्रामीणों के विरोध के बाद मारपीट शुरू हुई तो बोलेरो पर सवार हमलावरों ने आधे घंटे तक आठ राइफल से लगभग 26 राउंड गोली चलाकर कुछ ही देर में दस लोगों को ढ़ेर कर दिया। गोली लगने से पांच लोगों की मौत के बाद 100 नंबर पुलिस पहुंची लेकिन वह भी तमाशबीन ही बनी रही।

उभ्भा गांव में 150 बीघा जमीन पर कब्जे को लेकर ग्राम पंचायत मूर्तिया का प्रधान यज्ञदत्त पूरी तैयारी के साथ आया था। प्रधान ने इसके पहले भी उक्त जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया था लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण वह कामयाब नहीं हो सका। न्यायालय से भी प्रधान को राहत नहीं मिली तो वह असलहे के बल पर जमीन हथियाने की योजना बनाने लगा। इस बात की पुष्टि इससे होती है कि उभ्भा गांव में बुधवार की दोपहर वह 32 ट्रैक्टर ट्राली में तीन सौ से अधिक लोगों को ले गया था।

बोलेरो में राइफल से लैस लोगों का मौजूद रहना यह साबित करता है कि वह खून की होली खेलने की तैयारी पहले से ही कर लिया था। ग्रामीणों के विरोध के कुछ ही देरबाद बोलेरो में सवार राइफल से लैस आठ लोगों ने गोली चलाना शुरू कर दिया। करीब 26 राउंड गोली ग्रामीणों को लक्ष्य कर झोंक दी गई। काफी देर तक गांव में खून की होली खेली गई। पांच लोगों की हत्या के 10 मिनट बाद सौ नंबर पुलिस पहुंची। इस पुलिस के सामने भी हमलावरों ने गोली चलाना बंद नहीं किया। इसके बाद चार लोगों को गोली मारी गई। इस दौरान हमलावरों की तादाद अधिक होने के कारण पुलिस वाले मूकदर्शक बने रहे।    

मृतकों की सूची : रामचंदर (50) पुत्र लालशाह, राजेश गौड़ (28) पुत्र गोविंद, अशोक (30) पुत्र नन्‍हकू, रामधारी (60) पुत्र हीरा शाह, प्रभावती (45) पत्‍नी नंदलाल, दुर्गावती (42) पत्‍नी रंगीला लाल, राम सुंदर (50) पुत्र तेजा सिंह, जवाहिर (48) पुत्र जयकरन, सुखवन्‍ती (40) रामनाथ व आशोक गोंड पुत्र (35) हरिवंश।

गंभीर रूप से घायलों की सूची : केरवा देवी (50) पत्‍नी राम प्रसाद, रामधीन (35) पुत्र तेजा सिंह। 

मुख्‍यमंत्री ने प्रभावी कार्रवाई का दिया निर्देश

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने सोनभद्र में हुई इस घटना पर संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी सोनभद्र को वारदात में गंभीर रुप से घायल हुए लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने और दोषियों को पकड़ने के लिए बहुत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया है। मुख्‍यमंत्री ने कमिश्‍नर मीरजापुर और एडीजी जोन वाराणसी द्वारा मामले की साझा जांच रिपोर्ट 24 घंटों में मांगी है ताकि इस मामले में जिम्‍मेदारी तय की जा सके। 

गोली चलने के बाद पहुंची डायल 100
उभ्भा गांव में बुधवार को जमीन की नापी होनी थी। इसके लिए लेखपाल के साथ ही पुलिस को भी सूचना थी लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा था। प्रधान पक्ष के लोग जब फायङ्क्षरग करने लगे और लोगों की मौत हो गई तो सूचना पर सबसे पहले डायल 100 पुलिस पहुंची। इसके बाद उसकी सूचना पर फोर्स पहुंची।
 
 

...और देखते ही देखते बिछ गई लाशें

घोरावल कोतवाली क्षेत्र में ग्राम पंचायत मूर्तिया के ग्राम उभ्भा में बुधवार की दोपहर जमीन कब्‍जा करने को लेकर एक पक्ष ने असलहे के साथ हमला कर दिया, इसके बाद संघर्ष शुरू हो गया। संघर्ष के दौरान असलहा से लेकर गडासा तक चलने लगा जिसके बाद दस लोगों की मौत हो गई जबकि लगभग 25 लोग गंभीर रुप से घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, आनन फानन पुलिस अधीक्षक समेत तमाम अधिकारी मौके पर पहुंच गए। घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोरावल में भर्ती कराया गया है। जबकि गंभीर रूप से घायल आधा दर्जन लोगों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। भूमि विवाद ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के बीच शुरू हुआ था जो देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया और गांव में लाशें बिछ गईं। 

गांव में खून ही खून और मातम

ग्राम पंचायत मूर्तिया के ग्राम उभ्‍भा में सबकुछ सामान्‍य दिन की तरह ही चल रहा था कि दोपहर में पुराने जमीनी रंजिश काे लेकर विवाद का दौर प्रधान और ग्रामीण पक्ष के बीच शुरू हुआ। विवाद बढ़ते बढ़ते दोनों तरफ से असलहे और गडासे के साथ पूरा कुनबा एक दूसरे के सामने आ गया। देखते ही देखते गांव रणक्षेत्र में तब्‍दील हो गया। चारों ओर जान बचाने के लिए भागते लोग और खून से सने शव को देखने वाले भी सन्‍न रह गए। गांव में वारदात की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को तत्‍काल अस्‍पताल भेजा जहां पर कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं गांव में दस लोगों की मौत होने के बाद मातम पसरा हुआ है। 

घटना की बुनियाद आजादी से भी पुरानी

ओबरा-आदिवासी बाहुल्य जनपद में सदियों से आदिवासियों के जोत कोड़ को तमाम नियमों के आधार पर नजरअंदाज किया जाता रहा है। तमाम सर्वे के बावजूद अधिकारियों की संवेदनहीनता उन्हें भूमिहीन बनाती रही है। घोरावल के मूर्तिया उम्भा गांव में हुए खूनी संघर्ष में नौ लोगों की मौत के पीछे प्रशासनिक लापरवाही भी बड़ी दोषी रही है। इस गांव में पिछले 70 वर्ष से ज्यादा समय से खेत जोत रहे गोड़ जनजाति के लोग प्रशासन से गुहार लगाते रहे लेकिन उन्हें उनकी जमीन पर अधिकार नही दिया गया। जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह ने सहायक अभिलेख अधिकारी को मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था। लेकिन 2 फरवरी 2019 को उनके तबादले के चार दिन बाद 6 फरवरी 2019 को सहायक अभिलेख अधिकारी ने आदिवासियों की मांग को अनसुना कर बेदखली का आदेश दे दिया। यही निर्णय बुधवार की घटना का नीव बना।


वर्ष 1955 से लगातार चर्चा में रहा मामला 

यह मामला सन 1955 से चला आ रहा है। जानकारी के अनुसार बिहार के आईएएस प्रभात कुमार मिश्रा और तत्कालीन ग्राम प्रधान ने उम्भा की लगभग 600 बीघा जमीन को अपने नाम कराने का प्रयास शुरू कर दिया था। जबकि गांव के आदिवासी 1947 से पूर्व से ही इन जमीनों पर काबिज रहे हैं। उक्त आईएएस द्वारा तहसीलदार के माध्यम से 1955 में जमीन को आदर्श कोआपरेटिव सोसायटी के नाम करा लिया। जबकि उस समय तहसीलदार को नामान्तरण का अधिकार नही था।

उसके बाद उक्त आईएएस ने पूरी जमीन को 6 सितम्बर 1989 को अपने पत्नी और पुत्री के नाम करा दिया। जबकि कानून के अनुसार सोसायटी की जमीन किसी व्यक्ति के नाम नही हो सकती। इसी जमीन में लगभग 200 बीघा जमीन आरोपी यज्ञदत्त द्वारा 17 अक्टूबर 2010 को अपने रिश्तेदारों के नाम करा दिया गया। उसके बावजूद आदिवासियों का जमीन पर कब्जा बरकरार रहा। नामान्तरण के खिलाफ ग्रामीणों ने एआरओ के यहां शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन 6 फरवरी 2019 को एआरओ ने ग्रामीणों के खिलाफ आदेश दिया। ग्रामीणों ने उसके बाद जिला प्रशासन को भी अवगत कराया लेकिन उनकी एक नही सुनी गयी।

Posted By: Abhishek Sharma