वाराणसी, जेएनएन। नई दिल्ली की सीमा पर स्थित कपरसोड़ा निवासी अजित अपनी पत्नी निशा और छोटे भाई रोहित (28) उसकी पत्नी निशु और उसके ढेड़ साल के बच्चे को लेकर शनिवार की रात शहर में पहुंचे थे। देर रात में भेलूपुर इलाके में एक होटल में ठहरे और रविवार की सुबह पितरों का तर्पण और पूजन करने के लिए तुलसीघाट पहुंचे। सीढ़ी पर सामान रखकर चारों नहाने के लिए गंगा नदी के गहरे पानी में उतर गए। इस दौरान रोहित गहरे पानी जाने के कारण डूबने लगा। रोहित को पानी में डूबते देखकर घाट पर मौजूद लोगों ने सोचा कि रोहित मजाक कर रहा है। इसी बीच अचानक वह गहरे पानी में समा गया।

हादसे के बाद मौके पर मौजूद परिजनों सहित अन्य लोगों ने शोर मचाते हुए पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और एनडीआरएफ संग जल पुलिस को सूचना दी। सूचना आठ बजे दी गई लेकिन मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि टीम 11 बजे मौके पर पहुंची। ऐसे में एनडीआरएफ के जवानों का प्रयास निर्थक बना रहा। राजघाट के रहने वाले गोताखोर गजानंद शव को खोजने के लिए एक बजे बजे पहुंचे और दस मिनट में शव को घाट के सामने से निकाल दिया। इसके बाद शव को पुलिस पंचनाम कर परिजनों को सौप दिया। मृतक का एक ढेड़ साल का बेटा पीहू पिता की मौत से बेखबर रहा है। शव नदी से बाहर निकलते ही मृतक की पत्नी निशु के विलाप से घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

अब काशी कभी भी लौट कर नहीं आऊंगी

काशी में दर्शन पूजन करने के लिए खुशी- खुशी तुलसीघाट पर पहुंची निशु पति रोहित की मौत के बाद विलाप करते हुए कह रही थी कि अब कभी जिंदगी में लौट कर अभी नहीं आऊंगी। काशी से जिंदगी का जो सबक मिला है, वह तीन पीढ़ी नहीं भूल पाएंगी, बेटा और मेरी जिंदगी आगे की कैसी कटेगी।

घाट पर संकेतक बोर्ड लगवाना चाहिए

रोहित के भाई अजित और उसकी पत्नी निशा को जैसे ही पता चला कि ठीक एक महीने पहले चंदौली और सोनभद्र के रहने वाले दो छात्रों की मौत हो गई थी। इस बात को लेकर अजित ने जमकर जिला प्रशासन और घाट के व्यवस्थापक को जिम्मेदार मौत के लिए ठहराया।

Posted By: Abhishek Sharma

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस