वाराणसी [कृष्ण बहादुर रावत]। जुनून आदमी को किस स्तर तक ले जाता है इसका जीता जागता उदाहरण देखना है तो आपको जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर परमानंदपुर आना होगा। यहां पर एक व्यक्ति रहते हैं अशोक कुमार सिंह। उन्होंने बताया कि दंगल फिल्म देख कर उन्हें लगा कि उन्हें भी बालिकाओं के लिए कुछ करना होगा। कुछ दिनों तक सोच कर उन्होंने अपनी भूमि का लगभग आधा हिस्सा बेच कर उससे परमानंदपुर गांव में जमीन ली और उसे खेल मैदान में बदल दिया है।

वर्तमान समय में इस खेल मैदान पर ग्रामीण अंचल की आधा दर्जन से अधिक गांवों की 260 बालिकाएं कुश्ती, वालीबॉल, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन और एथलेटिक्स का निश्शुल्क प्रशिक्षण ले रही हैं। अशोक ने बताया कि बालिकाओं को कुश्ती का स्तरीय प्रशिक्षण मिले इसके लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर का कुश्ती मैट की व्यवस्था की है। सभी बालिकाओं को उन्होंने फ्री में किट भी मुहैया कराया है ताकि किसी बालिका में हीन भावना पैदा न हो। अभी इस खेल केंद्र को शुरू हुए मात्र दो माह हुआ है। 

कोच राजेश ने बताया कि सभी बालिकाएं 12 से 16 वर्ष तक की है और ये सुबह 5.30 से आठ बजे तक पसीना बहाती है। ये बालिकाएं होलापुर, क्षत्रियपुर, वाजिदपुर, परमानंदपुर, मुर्दहा और चमांव गांव से आती हैं। इनको अपने घर से केवल चना और गुड लाना होता है। बाकी सब व्यवस्था अशोक कुमार सिंह करते हैं। अगर कोई प्रतिभाशाली बालिका है और उसके पास साधन नहीं है तो उसको साइकिल भी दी जाती है। जिस तरह से बालिकाएं खेल का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है उसको देख कर लगता है कि एक वर्ष बाद ये बालिकाएं देश और प्रदेश के लिए पदक जीतने की स्थिति में पहुंच जाएंगी। 

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Posted By: Abhishek Sharma

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