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नए साल में बदलने जा रही है ग्रहों की चाल, राश‍ि अनुसार करें मकर संक्रांत‍ि पर दान, म‍िलेगा पुण्‍य

By SHAILESH KUMAR ASTHANAEdited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 13 Jan 2026 12:54 PM (IST)

आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, 13 से 18 जनवरी तक पांच ग्रह मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे पंचग्रह ...और पढ़ें

ज्योतिर्विद आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, यह संयोग भारत को भी प्रभावित करेगा।

ज्योतिर्विद आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, यह संयोग भारत को भी प्रभावित करेगा।

HighLights

  1. 13-18 जनवरी तक मकर राशि में पंचग्रह योग बनेगा।

  2. यह योग वैश्विक उथल-पुथल, राजनीतिक विघटन ला सकता है।

  3. मकर संक्रांति पर राशि अनुसार दान से मिलेगा विशेष पुण्य।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। आंग्ल नववर्ष के इस पहले माह में आकाश में एक असाधारण संयोग आकार ले रहा है। 13 से 18 जनवरी तक क्रमश: पांच ग्रह मकर राशि में पहुंचेंगे। इन ग्रहों का एक साथ जमावड़ा वैश्विक उथल-पुथल की परिस्थितियों का निर्माण करेगा। ज्योतिष की भाषा में इसे पंचग्रह प्रभाव कहा जाता है। ज्योतिर्विद आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, यह संयोग भारत को भी प्रभावित करेगा, किंतु विपरीत परिस्थितियों के बावजूद देश को कोई विशेष हानि नहीं होगी।

आचार्य शास्त्री ने बताया कि शुक्र ग्रह 13 जनवरी मंगलवार को भोर में 4:02 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 14 जनवरी की रात 9:39 बजे सूर्य मकर राशि में पहुंचकर मकर संक्रांति का उद्घोष करेंगे। इसके अगले दिन 16 जनवरी को मंगल ग्रह भोर में 4:36 बजे मकर राशि में पहुंचेंगे, जबकि बुध 17 जनवरी को सुबह 10:27 बजे और चंद्रमा 17 जनवरी को शाम 4:40 बजे इस राशि में सक्रिय होंगे।

चंद्रमा मकर राशि में सवा दो दिन तक रहेंगे, यानी 20 जनवरी की अर्धरात्रि के बाद 1:26 बजे तक। इसके बाद बुध, शुक्र और मंगल क्रमश: 3 फरवरी, 5 फरवरी और 23 फरवरी तक वहीं रहेंगे। इस प्रकार 18 से 20 जनवरी तक मकर राशि में पंचग्रह योग बनेगा, जिसके बाद चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा।

आचार्य दैवज्ञ ने बताया कि मकर राशि में ग्रहों का यह असामान्य जमावड़ा वैश्विक परिदृश्य में उथल-पुथल भरे घटनाक्रमों, राजनीतिक विघटन, आतंकवाद, युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन सकता है। आर्थिक उतार-चढ़ाव, भारत के विरुद्ध षड्यंत्र और सीमा पर तनाव जैसी घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, वैश्विक या सीमांत घटनाओं के बावजूद भारत को विशेष नुकसान नहीं होगा।

आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि इस तरह का योग पांच वर्ष पूर्व 2021 में भी बना था, लेकिन तब यह संयोग शुक्र की बजाय शनि के साथ था। उन्होंने यह भी कहा कि केवल ग्रहों का एक राशि में होना ही पर्याप्त नहीं होता, असली प्रभाव तब बनता है जब ग्रह डिग्री के स्तर पर एक-दूसरे के बेहद करीब आते हैं। इस बार 18 जनवरी के आसपास ये सभी ग्रह मकर के एक ही क्षेत्र में सिमटे होंगे, जिससे गोचर केवल भावनात्मक ही नहीं, बल्कि घटनात्मक भी बन जाएगा।

वर्ष में बदल जाती है संक्रांति की तिथि, राशि अनुसार यह करें दान

मेष : लाल मिर्च, लाल वस्त्र, मसूर दाल

वृषभ : सफेद तिल के लड्डू, चावल, चीनी

मिथुन : सब्जियां, मौसमी फल, साबुत मूंग

कर्क : जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, घी

सिंह : गुड़, चिक्की, शहद, मूंगफली का दान

कन्या : मूंग दाल की खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को खिलाएं

तुला : सफेद वस्त्र, मखाना, चावल, चीनी

वृश्चिक: मूंगफली, गुड़, लाल रंग के गर्म कपड़े

धनु : पीले वस्त्र, केले, बेसन, चने की दाल

मकर : काले तिल के लड्डू, कंबल

कुंभ : ऊनी कपड़े, सरसों तेल, जूता-चप्पल

मीन : पीली सरसों, चने की दाल, मौसमी फल