बलिया, लवकुश सिंह। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के पैतृक गांव लालाटोला सिताबदियारा देश का दूसरा झंडा निर्माण केंद्र बनेगा। अभी तक राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण कर्नाटक में हुबली शहर के बेंगेरी इलाके में होता है। कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ यहां तिरंगा बनाता है। वर्तमान में पूरे देश में यहीं से राष्ट्रीय ध्वज की आपूर्ति की जाती है। बहुत जल्द यह जेपी के गांव में भी बनना शुरू हो जाएगा।

केंद्र सरकार ने जयप्रकाश नारायण के गांव को विकास की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए 11 अक्टूबर 2016 को सात बड़ी परियोजनाएं शुरू की थीं। जेपी के पैतृक घर को वर्चुअल म्यूजियम बना दिया गया है। इसके अलावा 30 एकड़ में चित्र संग्रहालय, राष्ट्रीय झंडा निर्माण केंद्र, पंचायती राज शोध संस्थान, राष्ट्रीय खादी ग्रामोद्योग सेंटर व अध्ययन केंद्र का निर्माण होना है। सातों परियोजनाएं करीब 500 करोड़ की हैं। इसमें वर्चुअल म्यूजियम तैयार हो चुका है। अब झंडा निर्माण केंद्र की कवायद शुरू हो रही है।

यूपी व बिहार की 500 महिलाओं को मिलेगा रोजगार

लोकसभा सदस्य व जयप्रभा फाउंडेशन लालाटोला सिताबदियारा के अध्यक्ष वीरेंद्र ङ्क्षसह मस्त ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से सिताबदियारा में झंडा निर्माण केंद्र स्थापित हो रहा है। इससे यूपी-बिहार के 50 गांवों की 500 महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जाएगा। खादी व ग्रामोद्योग आयोग उन्हें प्रशिक्षित करेगा। संसाधन भी उपलब्ध कराएगा। सिताबदियारा देश में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।

18 तरह की लैब टेस्टिंग के बाद तैयार होता है झंडा

खादी और ग्रामोद्योग आयोग पटना के निदेशक एम हनिश ने बताया कि राष्ट्रीय ध्वज निर्माण के लिए ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआइएस) की स्वीकृति भी लेनी पड़ती है। राष्ट्रीय ध्वज की क्वालिटी को भी बीआइएस चेक करता है। कुल 18 तरह की लैब टेस्टिंग होती है। निर्धारित रंग के शेड से तिरंगे का शेड अलग न हो, केसरिया, सफेद और हरे कपड़े की लंबाई-चौड़ाई में जरा सा भी अंतर नहीं होना चाहिए। अगले-पिछले भाग पर अशोक चक्र की छपाई समान होनी चाहिए। अलग-अलग स्थानों के लिए झंडे का आकार भी भिन्न होता है। सबसे छोटा आकार 6 इंच लंबा व 4 इंच चौड़ा होता है, सबसे बड़ा आकार 21 फीट लंबा व 14 फीट चौड़ा होता है। खादी ग्रामोद्योग को गाइडलाइन मिलने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

Edited By: Saurabh Chakravarty