रामनगर की रामलीला में जन्मा लंकेश, अट्टहास से गूंज उठी लंका, राम की प्रत्यंचा ही करेगी इस अहंकार का नाश
रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला का अनंत चतुर्दशी पर भव्य श्रीगणेश हुआ, जिसमें रावण जन्म का रोचक प्रसंग मंचित किया ...और पढ़ें

रामनगर की रामलीला का भव्य शुभारंभ, रावण के जन्म और अहंकार का मंचन।

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जागरण संवाददाता, वाराणसी। कलयुग में काशी की धरा पर त्रेतायुग के दृश्य को जीवंत देख नयनों में आंसू छलक आए। रिमझिम फुहारों के बीच दूर-दूर से जुटे लीला प्रेमियों की आतुरता के बीच अनंत चतुर्दशी पर शुक्रवार को शाम रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला का भव्य श्रीगणेश हुआ।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र को नयनों से हृदय में उतारने का लोगों में उत्साह इस कदर रहा कि बारिश की बूंदों की परवाह किए बिना रेनकोट और छाता लगाए लीला प्रेमी डटे रहे। रंगकर्म से कहीं अधिक अध्यात्म और धर्म के रंग में सराबोर इस ऐतिहासिक लीला का पर्दा जब वैदिक विधि-विधान के साथ उठा तो रामनगर पूरी तरह से राममय हो गया और हर डगर पर भक्ति की रसधार बही।

रामलीला के प्रथम दिन का शुभारंभ रावण जन्म के अत्यंत रोचक प्रसंग के साथ हुआ। लीला में दर्शाया गया कि ब्रह्मा जी से अभय दान का वरदान प्राप्त करने के बाद रावण अहंकार से चूर हो गया। अपने इसी अहंकार में वह विश्वकर्मा द्वारा निर्मित भव्य स्वर्ण महल पर आक्रमण करता है और ब्राह्मणों के पवित्र यज्ञ-हवन में भयंकर विघ्न डालना शुरू कर देता है।
उसके आतंक की पराकाष्ठा तब देखने को मिलती है, जब वह अपने पूरे राज्य में वेद-पुराणों के पठन-पाठन और श्राद्ध-हवन जैसे सभी धार्मिक अनुष्ठानों पर पूर्णतया रोक लगा देता है। रावण के इस क्रूर कृत्य और बढ़ते अत्याचार से भयभीत होकर सभी देवता और ऋषि-मुनि देवराज इंद्र की सलाह पर बैकुंठ धाम पहुंचते हैं और भगवान श्रीहरि विष्णु की स्तुति करते हैं।
इस प्रसंग के जीवंत मंचन के दौरान रामबाग का ऐतिहासिक पोखरा श्रद्धा के भावों से सजकर साक्षात क्षीर सागर में तब्दील हो गया। लाल और श्वेत पारंपरिक रोशनी से नहाए इस क्षीर सागर में शेष शैय्या पर लेटे भगवान विष्णु की अद्भुत झांकी निखर उठी।
श्रीहरि के चरण दबातीं भगवती लक्ष्मी और कमल पुष्प पर आसीन ब्रह्मा जी की इस मनोहारी झांकी के दर्शन पाकर वहां उपस्थित श्रद्धालु हर हर महादेव और जय श्रीराम का गगनभेदी उद्घोष करने लगे। अन्याय और अधर्म से दुखी जनता के बीच प्रभु की वाणी गूंजी और उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए स्वयं मनुष्य रूप में अवतार लेने का भरोसा दिलाया। इस प्रसंग के साथ ही प्रथम दिन की लीला विश्राम की ओर बढ़ गई।

बग्घी से नहीं, कार से लीलास्थल पर पहुंचे कुंवर: रामनगर की रामलीला में परंपरा पर भी नेमियों की नजर टिकी रही। सुबह से रुक-रुककर हो रही बारिश में लीला को संशय रहा, लेकिन पांच बजकर 12 मिनट पर जैसे ही कुंवर अनंत नारायण सिंह कार पर सवार होकर किले से बाहर निकले तो हर हर महादेव के जयकारे गूंज उठे।
किला से लेकर रामबाग तक दो किलोमीटर तक मार्ग में जगह-जगह लोगों ने उनका अभिवादन किया। बारिश के कारण महाराज बाघेश्वरी बग्घी की बजाय चार पहिया वाहन से लीलास्थल तक गए। लीला स्थल पहुंचने पर हाथी पर बैठे 36वीं पीएसी की टुकड़ी ने सलामी दी।
दूसरे देश और प्रदेशों से भी आए लीला प्रेमी: रामनगर की रामलीला देखने के लिए आसपास के जिलों के अलावा दूसरे देश और प्रदेशों से भी लीला प्रेमी आए हैं। बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, नेपाल से आए श्रद्धालु लीला शुरू होने का इंतजार करते रहे। शाम पांच बजे से होने वाली लीला के लिए दोपहर में ही लीला प्रेमी एकत्रित होने लगे। दुर्गा मंदिर के पोखरे के पास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट गई।
साल भर बाद मिले नेमी, साझा किए भाव: रामनगर की रामलीला में कुछ नेमी ऐसे भी रहे जो साल भर बाद मिले। आपस में भूली-बिसरी साझा किया और फिर लीला देखने में मगन हो गए। इस बार अधिक मास के कारण अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से लीला पिछली बार से 18 दिन बाद से शुरू हुई है।
