जागरण संवाददाता, वाराणसी। आखिरकार मडि़हान मीरजापुर के पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी को लेकर लग रही अटकलों पर गुरुवार को विराम लग गया। पूर्वांचल की राजनीति में बड़ी पैठ रखने वाले औरंगाबाद हाउस ने बड़ा निर्णय लिया। चार पीढिय़ों से कांग्रेस का दामन थामकर देश की राजनीति में सक्रिय रहने वाले घराने के वर्तमान ने हाथ का साथ छोड़ दिया। औरंगाबाद हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में ललितेशपति ने कांग्रेस छोडऩे की घोषणा की। हालांकि, आगे का राजनीतिक सफर किस दल के साथ तय होगा, ऐसे सवालों पर ललितेशपति त्रिपाठी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से मेरे बारे में तमाम तरह की अफवाह फैलाई गई जिनका मैं खंडन करता हूं। भविष्य के बारे में अभी मैंने कोई फैसला नहीं लिया है। मैं साथियों के साथ बैठकर विचार विमर्श करूंगा, फिर आगे का निर्णय लूंगा।

ललितेशपति ने प्रेसवार्ता के प्रारंभ में ही कहा कि सबसे पहले मैं आपका क्षमाप्रार्थी हूं क्योंकि आप लोगों ने इस प्रकरण को लेकर मुझसे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन तब शायद वक्त सही नहीं था। प्रेस के माध्यम से मैं यह सूचित करना चाहता हूं कि मैंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों व प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। मैं आभार व्यक्त करना चाहता हूं मडि़हान की जनता का और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का। जो हमेशा से मेरे परिवार का हिस्सा रहे हैं। इसके साथ ही मैं आभार व्यक्त करता हूं कांग्रेस नेतृत्व का। खास तौर पर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का। उन्होंने मुझे राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर पार्टी की सेवा करने का मौका दिया। मेरे परिवार का कांग्रेस के साथ एक सौ साल से ज्यादा का नाता रहा है। यह प्रांगण जिसे औरंगाबाद हाउस कहते हैं, कई ऐतिहासिक आंदोलनों और परिवर्तन का केंद्र रहा है। लिहाजा, अंदाजा लगा सकते हैं कि यह फैसला मुझ पर कितना भारी रहा होगा। मेरे भीतर किसी के प्रति न कोई दुर्भावना है और न ही मन में कोई गांठ। बहुत तकलीफ होती है जब मैं कांग्रेस के हजारों समॢपत कार्यकर्ताओं को पार्टी स्तर से दरकिनार और नजरअंदाज होते देखता हूं। इसलिए मैंने यह कदम उठाया है। जिस कांग्रेस में कैडर नजरअंदाज किया जा रहा है वहां पर सांसद, विधायक या नेता बने रहने की गवाही मेरा जमीर नहीं दे रहा। यह कोई जल्दबाजी में महज़ किसी दल में शामिल होकर क्षणिक राजनीतिक लाभ के लिए नहीं लिया गया है बल्कि एक वृहद परिदृश्य को ध्यान में रखते लिया है। एक दशक पहले जब मैंने राजनीतिक जीवन में कदम रखा तो जनसेवा के प्रति समर्पण ही मेरा उद्देश्य था। मेरे सामने मेरे पूर्वजों द्वारा किए गए कार्यों का उदाहरण था। उनकी दी हुई विरासत को संजोये रखने की चुनौती भी थी। मुझे क्रिकेट का शौक था और इस खेल से मैंने यही सीख हासिल की है कि पिच पर दो तरह के बल्लेबाज होते हैं। एक वह जो रन बनाते हैं और एक वह जो टाइम पास करते हैं। सबकी अपनी अपनी भूमिका होती है लेकिन मैं टाइम पास करने के लिए राजनीति से नहीं जुड़ा। मैं यह खेद के साथ कहना चाहता हूं कि अपने लोगों की आकांक्षाओं और उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने में अक्षम महसूस कर रहा था। इसलिए मैंने अपना अलग रास्ता बनाने का निर्णय लिया है ताकि मैं समाज के शोषित, वंचित, किसान, नौजवान. हर वर्ग की मजबूती के साथ दे सके।

 

चर्चाएं हुईं गर्म, नए अटकलों को दी हवा

ललितेशपति ने आगे के राजनीतिक सफर को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं देने से चर्चाएं गर्म हो गई हैं। भले ही कांग्रेस में रहने व छोडऩे की अटकलों को विराम मिला हो लेकिन नए अटकलबाजी को हवा मिल गई है। सपा व भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोनभद्र के उम्भा कांड में भाजपा सरकार की सख्ती को भी ललितेशपति के इस्तीफे से जोड़ा जा रहा है। कांग्रेस के अंदरखाने में ही बातें हो रही हैं कि गोपालपुर में संस्था की संपत्ति पर शिकंजा कसने के बाद राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। पूरे प्रकरण में सपा के एक थिंक टैंक की अहम भूमिका भी बताई जा रही है। फिलहाल, कांग्रेस के अंदर बेचैनी साफ नजर आ रही है। कुछ साथ रहना चाहते हैं लेकिन कांग्रेस की निष्ठा ललितेशपति से उनकी दूरी बनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

परिवार ने खींचा पूर्वांचल का विकास

बता दें कि पूर्वांचल को विकास के रास्ते पर लाने का कार्य इस परिवार ने ही किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलापति त्रिपाठी ने चंदौली, मीरजापुर समेत पूर्वांचल के जिलों में नहरों का जाल बिछवाया तो साउथ इंडिया की ओर जा रहे बनारस रेलइंजन कारखाना को बनारस में स्थापित कराने का कार्य कराया जो यहां की जनसंख्या नियोजन में बड़ा योगदान साबित हुआ। इसके अलावा कई विशिष्ट कार्य पूर्वांचल के विकास को रेखांकित करता है।

Edited By: Saurabh Chakravarty