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    नवग्रह व वास्तुपूजा संग आरंभ हुआ मां विशालाक्षी मंदिर का कुंभाभिषेक अनुष्ठान,  11 तमिल ब्राह्मणों ने की पूजा

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 10:11 AM (IST)

    वाराणसी के मां विशालाक्षी शक्तिपीठ में कुंभाभिषेक अनुष्ठान का आरंभ वास्तुपूजा और नवग्रह पूजा के साथ हुआ। तमिलनाडु से आए 11 ब्राह्मणों ने वेदमंत्रों के साथ पूजन किया। प्रत्येक 12 वर्ष पर होने वाले इस अनुष्ठान में 1 दिसंबर को मुख्य कुंभाभिषेक होगा, जिसमें संगम के जल से शिखर का अभिषेक किया जाएगा और नई प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।

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    मीर घाट स्थित विशालाक्षी मंदिर में कुम्भाभिषेक के लिए लाई गईं प्रतिमाएं। जागरण

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। मां सती के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख मां विशालाक्षी शक्तिपीठ का कुंभाभिषेक अनुष्ठान शुक्रवार को वास्तुपूजा व नवग्रह पूजा के साथ आरंभ हो गया। तमिलनाडु से आए वैदिक विद्वान डा. शिवश्री के पिचई गुरुकुल व शिवश्री एम सुंदर गुरुकुल के आचार्यत्व में 11 तमिल ब्राह्मणों ने पूजन आरंभ किया। वेदमंत्रों के उच्चारण से समूचे परिसर सहित आसपास का वातारण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। प्रत्येक 12 वर्ष पर होने वाला मां विशालाक्षी शक्तिपीठ का यह नौवां कुंभाभिषेक है।

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    इसके निमित्त कर्मकांडी व वैदिक विद्वान ब्राह्मण पुजारियों का दल बुधवार की रात में तमिलनाडु से यहां पहुंच गया था। गुरुवार को तमिल ब्राह्मण पुजारियों व वैदिक कर्मकांडियों के इस दल नेे शक्तिपीठ पहुंचकर अनुष्ठान की निर्विघ्न सफलता के लिए विघ्न विनाशक गणपति का पूजन कर आशीर्वाद लिया। शुक्रवार को प्रथम दिन वैदिक मंत्रों के साथ अनुष्ठान आरंभ हुए। कुंभाभिषेक का मुख्य अनुष्ठान एक दिसंबर को होना है।

    इसके पूर्व अब शनिवार को दोपहर बाद तीन बजे से प्रथम याज्ञशाला का अनुष्ठान होगा। यज्ञारंभ होकर सायं सात बजे तक चलेगा, तत्पश्चात आरती होगी। अगले दिन रविवार को भी प्रात:काल नौ बजे से द्वितीय याज्ञशाला के अनुष्ठान संग हवन-यज्ञ आरंभ हो जाएंगे। सायं 4.15 बजे से पूजा व आरती होगी। अंतिम दिन एक दिसंबर को प्रात:काल सात बजे से नौ बजे तक यज्ञ होगा।

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    इसेक पश्चात 9:30 बजे से पूजन व मंदिर की परिक्रमा की जाएगी। प्रात:काल 10 से 10:20 बजे तक कुंभाभिषेक होगा। संगम के जल से शिखर का अभिषेक कर शिखर पर छह स्वर्ण कलश स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही माता विशालाक्षी मंदिर के गर्भगृह में दो और शक्तिपीठों की देवियों मां कामाक्षी व मां मीनाक्षी की प्रतिमाओं के अतिरिक्त भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की भी प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।

    गाणपत्य पूजन व यज्ञ के साथ कुंभाभिषेक के विभिन्न अनुष्ठान आरंभ हो जाएंगे। मंदिर के महंत पं. राजनाथ तिवारी ने बताया कि मंदिर का कुंभाभिषेक प्रत्येक 12 वर्ष पर होने वाला एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान है। इसमें पूरे धार्मिक विधि-विधान से मंदिर का जीर्णोद्धार कर, रंग-राेगन कर नया स्वरूप दिया जाता है। इसके अंतर्गत विविध धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। कुंभाभिषेक का अनुष्ठान होगा श्रीकाशी नाट्टकोट्टई नगरम् क्षत्रम मैनेजिंग सोसाइटी के तत्वावधान में किए जा रहे हैं।