वाराणसी : महात्मा गाधी के सपनों को साकार करने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयास रंग लाने लगा है। रविवार को उन्होंने मन की बात में खादी पर चर्चा की। कहा कि इन दिनों खादी के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। जिससे खादी की बिक्री में बढ़ोत्तरी हुई है। इससे गरीब के घर से सीधा-सीधा रोजगार का संबंध जुड़ गया है। इस दिवाली पर खादी खरीदकर गरीबों के घर दीया जलाएं। मालूम हो, सेवापुरी का खादी आश्रम 26 साल से बंद पड़ा था, लेकिन आज पुनर्जीवित हो गया। देश में कभी स्वदेशी सामान की पहचान बनाने वाले व लोगों को रोजगार उपलब्ध करने के लिए प्रसिद्ध सेवापुरी विकास खंड के घोसिला गाव में लगभग 40 एकड़ में फैली संस्थाएं पिछले कई वर्षो से बंद थीं। हालांकि महात्मा गाधी के स्वदेशी के सपने को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उठाए कदम का असर सेवापुरी में भी दिखाई देने लगा है। गांधी आश्रम, गाधी निधि व सघन क्षेत्र विकास समिति अब अपनी पुरानी स्थिति में लौटने लगी है। खादी ग्रामोद्योग से इन संस्थाओं को 500 चरखे, 100 करघे व 500 से अधिक सोलर पैनल मिले हैं। यहां अब तक 100 चरखों व 25 करघों पर काम शुरू भी हो गया है। केंद्र सरकार की पहल से हजारों बेरोजगार इन संस्थाओं से प्रशिक्षण लेकर अपने साम‌र्थ्य पर परिवार चलाने के साथ अन्य लोगों को रोजगार मुहैया करा रहे हैं।

- सरकार ने दिया पुनर्जीवन

केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद संस्थाओं को शुरू करने की दिशा में काम शुरू हुआ। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने खादी ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना, खादी ग्रामोद्योग आयोग के डिप्टी सीईओ एसएन शुक्ल और वाराणसी के निदेशक बलधारी सिंह को भेजकर संस्थाओं के संचालन पर अमल कराया।

- धीरेंद्र व अक्षय ने किया था शुरू

नवंबर 1946 में महात्मा गाधी की प्रेरणा से धीरेंद्र भाई व अक्षय कुमार उर्फ कर्ण भाई ने गाधी आश्रम स्थापित किया था। गाधी आश्रम के प्रभुनाथ सिंह की देखरेख में वर्तमान में प्रेमचंद शर्मा प्रशिक्षण देते हैं। सघन क्षेत्र के मंत्री संतोष सिंह का मानना है कि अब यहा के दिन भी बहुरेंगे और बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।

- हो रही ठीकठाक आमदनी

गाधी आश्रम में चरखा चलाने वालीं मीना, जनक वंदना, लालमनी, उषा, मुन्नी, सरोजा, वैष्णवी विश्वकर्मा, मनभावनी, निर्मला कुमारी आदि ने बताया कि हम सब हुनरमंद तो हो ही रहे हैं। साथ ही सूत कातकर प्रतिदिन ठीक-ठाक आमदनी भी हो जा रही है। जो घर-गृहस्थी को संवारने में मददगार साबित हो रही।

Posted By: Jagran