जागरण संवाददाता, वाराणसी : सावन तो हर साल आता है, लेकिन अबकी श्रद्धा का सावन खूब लहलहाया। बाबा दरबार में श्रद्धा गंगा का प्रवाह इतना तेज रहा की दर्शनार्थी संख्या के रिकार्ड टूट गए। सिर्फ श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में 65 लाख लोगों ने बाबा का दर्शन-पूजन व दूध-जल से अभिषेक किया। इसमें कांवडिय़ों समेत देश भर से आए श्रद्धालु तो थे ही स्थानीयजनों का उत्साह भी उफान पर रहा। इसमें श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के नव्य-भव्य स्वरूप ने तो श्रद्धालुओं को आकर्षित किया ही कोरोना के कारण दो साल के अंतराल ने भी यह उछाल दिया।

कोरोना से पहले के वर्षों में श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में सावन पर्यंत श्रद्धालुओं की संख्या 25 से 30 लाख तक होती थी। इस बार सिर्फ अंतिम सावन को ही सात लाख बाबा दरबार आए। अन्य तीन सोमवार को भी यह संख्या लगभग छह लाख तक रही तो अन्य दिन भी एक से डेढ़ लाख श्रद्धालुओं का आना हुआ।

अमूमन यही स्थिति गंगा-गोमती तट स्थित मार्कंडेय महादेव धाम समेत समूचे काशी क्षेत्र में गांव से लेकर शहर तक के शिव मंदिरों में रहा। उनमें दर्शन-पूजन के लिए भोर से जो कतार लगी तो रात तक विस्तार लेती रही। खास यह कि दो साल के अंतराल पर कांवडिय़े उमड़े भी तो उनमें गजब का अनुशासन भी दिखा। उनके भाव से शहर की सड़कें, गलियां पटी रहीं। कोई ऐसी गतिविधि इस बार नहीं दिखी जो गलत छवि प्रस्तुत करे।

सिर्फ एक माह में 39 लाख सैलानी

बाबा धाम के विस्तार के बाद बनारस में सैलानियों के आने के भी रिकार्ड टूट गए हैैं। कोरोना से पहले जहां 65 लाख तक देसी-विदेशी श्रद्धालु आते थे। अबकी सिर्फ जुलाई में ही 39 लाख सैलानी बनारस आए। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी कीर्तिमान श्रीवास्तव के अनुसार कोरोना की बंदिशों से मुक्त श्रद्धालुओं में इस बार कुछ अधिक ही उत्साह रहा। इसमें श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के नव्य-भव्य स्वरूप ने सर्वाधिक आकर्षित किया। श्रद्धालु यहां आए तो आसपास के जिलों के शिवालयों में भी पहुंचे। आंकड़े बता रहे है कि काशी में धार्मिक पर्यटन धार पा रहा है।

Edited By: Saurabh Chakravarty