जागरण संवाददाता, वाराणसी : श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण एवं सुंदरीकरण परियोजना में गंगधार से एकाकार काशीपुराधिपति दरबार की दीवारें शिव-शक्ति की महिमा बखानती नजर आएंगी। शास्त्र-पुराण के पन्नों में सहेजे गए 'काशी-विश्वनाथ-गंगे से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का दर्शन भी कराएंगी। मुख्य परिसर में भीतरी ओर श्रद्धालुओं को जप-तप के लिए बनाए गए गलियारे में यह समाहित दिख जाएंगी। इसमें संगमरमर के श्वेत -धवल 42 पैनलों के जरिए आध्यात्मिकता वातावरण को आधार दिया गया है।

इनमें चित्रात्मक (पिक्टोरियल) 20 पैनलों में शिव का काशी आना, ढूंढिराज गणेश का स्तुति गाना, माता पार्वती संग कैलाश वास और तारक मंत्र देकर आवागमन के बंधनों से मुक्ति दिलाना दिख जाएगा। गलियारा अष्ट भरव, 56 विनायक व 64 योगिनियों तक के दर्शन कराएगा। इसके साथ ही 22 व्याख्यात्मक (राइटअप) पैनलों में समाहित स्तुति-मंत्र पूरी भव्यता के साथ कुछ इस तरह उकेरे गए हैैं जिनके सामने आते कोई भी इनका पाठ करने को विवश हो जाएगा।

वास्तव में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का विस्तार के पीछे परिकल्पना थी कि बाबा तक उनके भक्तों की राह सुगम की जाए। उन्हें परिसर में पूजन-अर्चन के लिए भरपूर स्थान व वातावरण दिया जाए। इस दृष्टि से बाबा दरबार से गंगधार तक 5,27,730 वर्ग फीट क्षेत्र में श्रद्धालु सुविधाएं विकसित की गईं। मुख्य परिसर को भी 10,417 वर्ग फीट तक विस्तारित कर चुनार के गुलाबी नक्काशीदार पत्थरों से गलियारे को आकार दिया गया ताकि बाबा का दर्शन के बाद श्रद्धालु जप-तप कर सकें। आध्यात्मिकता का समावेश करने के लिए इसमें चित्रात्मक -व्याख्यात्मक पैनल लगाए गए। चित्रात्मक पैनलों पर विभिन्न प्रसंग उकेरने के साथ ही वर्णन किया गया। व्याख्यात्मक पैनलों पर देवध्यान स्तुति, महामृत्युंजय मंत्र, शिव स्तुति आदि उकेरी गई है। इसके लिए श्रीकाशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के नेतृत्व में शास्त्र- पुराण, वेद-उपनिषद का अध्ययन करा कर तथ्य संग्रह किया गया।

चित्रात्मक पैनल : रिपुंजय (दिवोदास) का काशी राज्य, शिव-पार्वती विवाह, त्रिशूल पर काशी, कैलाश पर शिव-पार्वती व नंदी, भगवान शिव द्वारा विश्वेश्वर लिंग स्थापना, अद्र्धनारीश्वर शिïव का प्रादुर्भाव, दक्ष सुता सती प्रसंग, मणिकिर्णका तीर्थ की स्थापना, भगीरथ तप व गंगावतरण, भगवान विश्वेश्वर का काशी विरह, 64 योगिनियों को काशी भेजना, काशी में द्वादश आदित्य स्थापना, भगवान शंकर द्वारा तारक मंत्र, कपिलधारा तीर्थ स्थापना, अष्टमातृका स्थापना, 56 विनायक स्थापना, पंचनद तीर्थ स्थापना, विश्वेश्वर के काशी आगमन पर ढूंढिराज गणेश की स्तुति, ब्रह्मïा विष्णु विवाद शमनार्थ ज्योतिर्लिंग प्राकट्य, महाकवि कालिदास की शिïव स्तुति।

व्याख्यात्मक पैनल: देवध्यान स्तुति, महामृत्युंजय ध्यान मंत्र, शिव स्तुति, शिव महात्म्य स्तोत्रम, त्र्प्रथ सांध्य प्रार्थना, लिंगाष्टकम् स्तोत्र, शिवताराडवस्तोत्रम, शिवकवचम्, काशी पंचमकम्, शंकराष्टकम्,्रुरुद्राष्टकम्, भवान्याष्टकम्, श्रीविश्वनाथाष्टकम्, प्रदोष स्तोत्राष्टकम्, पशुपत्याष्टकम्, शिवनामावल्यष्टम्, देवापराधक्षमापनस्तोत्रम, दुर्गाष्टकम्।

Edited By: Saurabh Chakravarty