वाराणसी, कुमार अजय। पक्का महाल यानी काशी के आदि निवासी निषाद, डोम के पुरवों के बीच गंगा तीरे बसी शिव नगरी काशी की पहली बस्ती जिसे आगे चलकर प्रांत-प्रांतांतरों से आए विप्रों ने तीर्थ के रूप में संवारा। समय आगे बढ़ा, फिर देश के कोने कोने से जुटे वणिक प्रतिनिधियों ने अपने उद्यमों से इसके आर्थिक वैभव को निखारा।

सोमवार को जब प्रधानमंत्री मोदी ने लोक के देवता की दिव्य-भव्य और नव्य लोकपुरी को लोक के ही नाम समर्पित किया तो हमारे मन में संकरी गलियों में बसी इसी बस्ती का स्पंदन भांपने की धुन समाई। अलस भोर में ही दैनिक जागरण ने गोलघर द्वार से होते हुए पक्के महाल की सांकल खड़काई। प्रथम प्रवेश के साथ ही दृष्टिपथ में थी उत्सवी रंगों में रंगी मनोहारी दृश्यावली, हर तरफ छलकती उछाह की गागर, हहराता-लहराता उमंगों का सागर। हर हर, बम बम का परंपरागत नाद। कण कण से फूटता अगराया आह्लïाद। हर कोई इस बात से गदगद कि विधि ने भाग्य की ऐसी लेखा बनाई कि एक पूरी पीढ़ी को इतिहास बनते देखने की साध पुराई।

मणिकर्णिका माई क दिन बहुरल

चौखंभा की भूल भुलैया सरीखी गलियों से होते हुए, स्वयं को उत्सव के इंद्रधनुषी रंगों से भिंगोते हुए हम पहुंच जाते हैैं मणिकर्णिका घाट तक। यहां पहली मुलाकात होती है डोमराज परिवार के प्रतिनिधि राम बाबू चौधरी से। कहते हैैं-मोदी जी जबसे दिल्ली क कुर्सी पवले हउअन, डोम समाज क मान बढ़वले हउअन। जिनगी में कबहू सोचले नहीं रहलीं कि एक दिन अइसन आई कि बाबा के धाम में सरगे (स्वर्ग) क रूप समा जाई। मोदी गुरु तू गजब कइला, काशी नगरी क भगीरथ बन गईला। डोम चौधरी धरम राज (मीरघाट) भी यहीं घूमते पाए जाते हैैं, विश्वनाथ धाम की भव्यता का बखान करते नहीं अघाते हैैं। उनका कहना है कि-पीएम साहेब के जोग जतन से अइसन चमत्कार भयल कि बाबा के साक्षात दर्शन बदे कलप के रह गईल मणिकर्णिका माई क साध पुरा गयल।

रोजी-रोजगार संवर जाई

बाबा विश्वनाथ के आराध्य श्रीराम प्रभु को भी पार उतारने वाले निषाद राज गुह के वंशज हैैं। इस गर्व के साथ मदन साहनी, चंदन केवट व नापित संजय शर्मा अपने पुरखों की यशोगाथा सुनाते हैैं। कहते हैैं कि अबहिए से इ हाल हौ कि जात्रियन (तीर्थ यात्री) का भीड़ चंपल जात हौ। पक्का माना इ कोशिश रंग देखाई, केवट समाज क रोजी-रोजगार जलदिए (जल्दी) चउचक बरक्कत (बरकत) पाई।

मोदी ने इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ जोड़ा

पक्के महाल के पुराने रहनवार विप्रवर आचार्य मुरधीधर गणेश पटवर्धन व पंडित योगेश नारायण चतुर्वेदी विश्वनाथ धाम के नूतन वैभव को समूचे राष्ट्र के वैभव के पुनस्र्थापन का पर्याय मानते हैैं। कहते हैैं कि गंगा को साक्षी मानकर पीएम मोदी ने जो संकल्प उठाया था, उसे पूरा कर दिखाया है। अपनी कर्मठता के दम पर इतिहास में स्वर्णिम पृष्ठ जोड़ा है। समय की धारा को नई दिशा की ओर मोड़ा है।

धन्य है हमारी पीढ़ी

कभी काशी के रईसों के रईस रहे बाबू भारतेंदु के वंशज दीपेश चंद्र चौधरी व भारत भारती परिषद के संस्थापक अशोक वल्लभ दास का मानना है कि-धन्य है हमारी पीढ़ी, जिसने अपनी आंखों के सामने एक इतिहास बनते देखा। इस अवसर को जीवन निधि के रूप में जतन से सरेखा (सहेजा)। प्रधानमंत्री ने अपने संकल्प के अनुसार जिस तरह महालय और गंगा के बीच के दृष्टिपथ को एकाकार किया है, वह अकल्पनीय है। रही कुछ गलियों व मोहल्लों का नक्शा बदल जाने की बात तो कहीं हो, कभी हो ध्वंस पर ही नवनिर्माण होता है, कौन कहता है कि पक्के महाल का अस्तित्व बिखर गया है, आइए और देखिए कि काशी की इस पहली बस्ती का सौंदर्य कितना निखर गया है।

Edited By: Saurabh Chakravarty