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वाराणसी, जेएनएन। पेशे से इंजीनियर मंडुआडीह के कंचनपुर कंदवा के संतोष भारद्वाज अपनी पत्नी व बच्चों के साथ टीवी देख रहे थे। सुषमा स्वराज के निधन की खबर जैसे ही समाचार चैनलों पर चली, पूरा परिवार शोकाकुल हो गया। भोजन की थाली पड़ी रह गई, मानो परिवार का कोई सदस्य दुनिया को अलविदा कह गया। हो भी क्यों न, सुषमा स्वराज संतोष व उनके परिवार के लिए किसी भगवान से कम नहीं थीं। सुषमा स्वराज के चलते ही कंचन का सुहाग आज जिंदा है।

समुद्री लुटेरों ने किया था अगवा

संतोष भारद्वाज का 25मार्च 2016 को नाइजीरियाई समुद्री लुटेरों ने अपहरण कर लिया था। विदेश में अगवा पति को छुड़ाने के लिए कंचन ने कई जगह गुहार लगाई लेकिन कुछ नहीं हुआ। पति की सलामती के लिए खाना-पीना छोड़ दिया। इस बीच एक परिचित के सुझाव पर कंचन ने सुषमा स्वराज को ट्वीट करके पति को नाइजीरिया के समुद्री लुटेरों से आजाद कराने की गुहार लगाई। सुषमा स्वराज ने तुरंत उनकी ट्वीट पर जवाब दिया कि आप खाना-पीना न छोड़ें। विदेश मंत्रालय सक्रिय हुआ तब पता चला कि संतोष के साथ ही दो यूक्रेन, एक पाकिस्तान, एक बांग्लादेश के नागरिक का भी अपहरण हुआ है। सुषमा स्वराज ने नाजीरिया सरकार पर दबाव बनाया। समुद्री लुटेरों ने संतोष को छोड़ दिया। नौ मई को नाइजीरिया से दुबई और 10 मई को संतोष मुंबई से होते हुए वाराणसी पहुंचे। 

संतोष की रिहाई के बाद सुषमा स्वराज ने कंचन को ट्वीट कर बधाई भी दी। सुषमा स्वराज की उस मदद को यह दंपती कभी भूल नहीं सकता। सुषमा स्वराज की तबीयत बिगडऩे की जानकारी पर पिछले दिनों संतोष परिवार समेत दिल्ली जाने वाले थे उनसे मिलने लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं जा सके। सुषमा स्वराज से मिलने की इच्छा अधूरी रह गई। 

यूक्रेन तक निभाया था सुषमा स्वराज ने 'दर्द' का रिश्ता

लंका थाना क्षेत्र के नंदनगर में 13 नवंबर 2015 की सुबह यूक्रेन की पर्यटक अपने मित्र सिद्धार्थ के ठहरी हुई थी। विवाद होने पर उसी के मित्र ने उसपर तेजाब फेंक दिया। विदेशी युवती के चहरे का बहुत सा हिस्सा झुलस गया था। ट्वीट के जरिए विदेश से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में मददगार की आवाज पर कार्रवाई करने वाली सुषमा स्वराज ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया। विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा स्वराज ने इस पूरे प्रकरण को खुद ही अपनी निगरानी में रखा। प्राथमिक इलाज के बाद युवती को यूक्रेन भेज दिया गया था। युवती के साथ हुए हादसे को वह भूली नहीं थीं। विदेश मंत्री के तौर पर जब वह यूक्रेन दौरे पर गईं तो वहां पीडि़त युवती व उसके परिजनों से मुलाकात भी की व उनके दर्द को साझा किया। एसिड अटैक पीडि़ता का परिवार सुषमा स्वराज की इस आत्मीयता का कायल हो गया। यूक्रेन में सुषमा स्वराज के कदम की प्रशंसा हुई थी। बतौर विदेश मंत्री पीएम के काशी की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुधारने का यह सार्थक प्रयास आज भी लोगों की जुबान पर है।

भारतवंशियों ने भी दी श्रद्धांजलि

काशी में हुए 15वें प्रवासी भारतीय दिवस के शानदार आयोजन के पीछे सुषमा स्वराज की मेहनत थी। समारोह में शामिल होने दुनिया के विभन्न देशों में रह रहे भारतवंशी भी सुषमा स्वराज की वाकपटुता के कायल थे। प्रवासी भारतीय दिवस के मौके पर समारोह के मुख्य अतिथियों में शामिल नॉर्वे से भारतवंशी सांसद हिमांशु गुलाटी और न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के सांसद कंवलजीत सिंह बक्शी ने भी सुषमा स्वराज से काफी बातचीत की थी। उनके निधन पर दोनों ने सुषमा को अपनी श्रद्धांजलि दी है। अपने देश मे संसदीय पदों पर आसीन दोनों ही भारतवंशियों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में न्यूजीलैंड के सांसद कंवलजीत सिंह बक्शी ने उन्हें शानदार और ओजस्वी भारतीय नेता बताया तो नॉर्वे की संसद सदस्य हिमांशु गुलाटी ने काशी में जनवरी में आयोजित प्रवासी भारतीय दिवस पर विदेश मंत्री संग बिताए पलों को कभी न भूलने वाले पल के तौर पर उनको खुद के लिए प्रेरक बताया है। दोनों ही भारतवंशी सांसदों ने सोशल मीडिया पर तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की तस्वीरें भी साझा की हैं।

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Posted By: Abhishek Sharma

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