काशी का ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ प्रकरण चर्चा में, उठे सवाल तो थाने तक जा पहुंचा मामला, बंटबारे से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
काशी में 'पाकिस्तानेश्वर महादेव' शिवलिंग का इतिहास भारत-पाकिस्तान बंटवारे से जुड़ा है, जिसे एक हिंदू परिवार पाकिस्तान से लाया था। ...और पढ़ें
HighLights
‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ शिवलिंग का इतिहास भारत-पाकिस्तान बंटवारे से जुड़ा है।
मंदिर में फ्लेक्स बोर्ड लगाने और ताला लगाने पर विवाद गहराया।
पूर्व पार्षद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जांच जारी है।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी में गंगा किनारे एक ऐसा शिवलिंग है जिसे पाकिस्तानी महादेव के नाम से जाना जाता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह शिवलिंग पाकिस्तान से लाया गया था। बताया जाता है कि जब भारत का बंटवारा हुआ, तब वहां के हिंदू लोगों को मारकर भगाया जाने लगा।
उस समय एक हिंदू परिवार के घर में यह शिवलिंग स्थापित था। परिवार ने सोचा कि मुसलमान लोग इसका अनादर करेंगे, इसलिए इसे काशी में ले जाकर गंगा में विसर्जित करने का मन बनाया, लेकिन अंततः इसे तट पर ही स्थापित कर दिया गया।
यह परिवार काशी आकर राज मंदिर मोहल्ले में रहने लगा। वहां एक अखाड़ा है, जिसके नीचे मंदिर में इस शिवलिंग को स्थापित किया गया। बाद में परिवार ने मंदिर का जीर्णोद्धार भी करवाया। आज भी यह शिवलिंग पाकिस्तानी महादेव के नाम से जाना जाता है और गंगा किनारे श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
हाल ही में राजमंदिर स्थित शीतलाघाट के एक प्राचीन सार्वजनिक शिव मंदिर को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है। ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम का फ्लेक्स बोर्ड लगाए जाने की शिकायत पुलिस से की गई है। पूर्व पार्षद घनश्याम सिंह ने कोतवाली थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, कुछ दिन पहले करीब 15 से 20 लोगों के समूह ने मंदिर परिसर में उक्त बोर्ड लगाया। आरोप है कि इसके बाद मंदिर पर ताला भी लगा दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि मंदिर लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए सार्वजनिक पूजा स्थल रहा है, जहां गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु दर्शन-पूजन करते रहे हैं।
बोर्ड हटाने को लेकर विवाद की स्थिति पैदा होने और मंदिर के अंदर डमरू रखे जाने का भी शिकायत में उल्लेख है। इस मामले ने स्थानीय समुदाय में चिंता और असंतोष पैदा कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह शिवलिंग न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह इतिहास का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बंटवारे के समय के घटनाक्रम ने इस शिवलिंग को एक विशेष पहचान दी है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार के विवादों से धार्मिक स्थलों की पवित्रता को खतरा होता है। इस प्रकरण ने यह भी दर्शाया है कि धार्मिक स्थलों के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है और वे अपने धार्मिक प्रतीकों की रक्षा के लिए कितने सजग हैं।
इस विवाद के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन को सक्रियता से कार्य करना होगा ताकि श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया जा सके और मंदिर की पवित्रता बनी रहे। इस मामले में आगे की कार्रवाई और स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या श्रद्धालुओं की आस्था को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
काशी का ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ प्रकरण न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह प्रकरण स्थानीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है और इसके समाधान की दिशा में उठाए गए कदमों पर सभी की नजरें रहेंगी। हालांकि क्षेत्र में मंदिर पर कब्जे को लेकर चर्चा खूब हो रह है।
