वाराणसी, जेएनएन। लैंगिक नीति को लेकर एपॉलिटिकल संस्था ने दूसरी वार्षिक सूची-2019 जारी कर दी है। इसमें दुनिया के 1000 प्रभावशाली लोगों में सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक व काशी की बेटी डा. रंजना कुमारी का नाम भी शामिल है जो गौरव की बात है। डा. रंजना ने अपना जीवन दक्षिण एशियाई क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण को समर्पित कर दिया है। एपॉलिटिकल ने विभिन्न देशों की सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों व शैक्षणिक समुदायों की ओर से प्राप्त नौ हजार से अधिक नामांकनों के आधार पर सूची को तैयार किया है।

अपॉलिटिकल की सूची में डा. रंजना के अलावा अमेरिका सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश कैरेन ग्रोन, विश्व बैंक समूह में लैंगिक विषयों के वरिष्ठ निदेशक मिशेल बेचेलेट, मानवाधिकार के लिए उच्चायुक्त संयुक्त राष्ट्र की मिशेल ओबामा जैसे एक हजार लोग शामिल हैं। इस सूची में भारत से सिर्फ दो लोगों का नाम शामिल है। जनपद में हुई स्कूली शिक्षा जनपद की मूल निवासी डा. रंजना की स्कूली शिक्षा वाराणसी में ही हुई थी। उनके दादा स्वतंत्रता सेनानी पं. विश्वनाथ शर्मा काशी विद्यापीठ के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे। स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए डा. दिल्ली चलीं गई। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान से एमए, एमफिल व पीएचडी की उपाधि हासिल की।

हत्या की घटना ने सामाजिक कार्य के लिए किया प्रेरित  : वर्ष 1976 में डा. रंजना के घर के पास एक महिला की दहेज के लिए हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने डा. रंजना को झकझोर दिया। साथ ही इस घटना ने उन्हें सामाजिक कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने विश्व प्रसिद्ध प्रकाशन ब्राइड्स आर नॉट बर्निग के माध्यम से अपनी सक्रियता का प्रदर्शन किया। लैंगिक मुद्दों पर उन्होंने आठ से अधिक ग्रंथों की रचना की। एशिया में महिलाओं व समाज के योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित लोटस लीडरशिप अवार्ड का भी पुरस्कार मिल चुका है।

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