वाराणसी, जेएनएन। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सुहागिन महिलाओं ने पति की आरोग्यता, दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए बुधवार को दिनभर निराजल व्रत रखा। इसकी शुरुआत मंगलवार को मध्यरात्रि के बाद सरगी से हुई। सुबह स्नान ध्यान के साथ महिलाओं ने व्रत की शुरुआत की। सुबह से ही सुहागिन महिलाएं सजने-संवरने में व्यस्त थीं। इसके बाद शाम को पूजा के लिए खीर और दाल की पूड़ी का प्रसाद बनाकर शुभ मुहुर्त में भगवान शिव-पार्वती सहित पूरे परिवार के साथ-साथ चंद्र देव की पूजा-अर्चना की।

रात में 7.57 मिनट पर चंद्रोदय के पश्चातमहिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्‍य देने के बाद सुहागिनों ने अपने चांद का दीदार करने बाद अपना उपवास समाप्त किया। सूर्यास्त के बाद शुरु हुई पूजासूरज के डूबने औरचांद के आने के आहट के मध्य समय में सुहागिनों ने पूजा की शुरुआत की। पीली मिट्टी और बालू से वेदी बनाकर सबसे पहले भगवान की स्थापना की गई। उसके बाद उस पर करवा रखागया। वेदी को भगवान का स्वरूप देने के बाद उनको चंदन, रोली, सिंदुर लगाया गया। फिर धूप-दीप जलाकर उनकी पूजा की गई। दिन में बनाया गया खीर और दाल की पूड़ी, सिघांड़ा,नारियल का लड्डू व केला चढ़ाया गया। इसके बाद सुहागिनों ने माता करवा की कथा काश्रवण किया। रात 7.57 मिनट पर चंद्रमा के दर्शन के पश्चात सुहागिनों ने अघ्र्यदेकर अपने चांद का दीदार किया। उसके बाद पति और घर के सभी बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त किया।

पारण के बाद पिया ने दिया उपहार पूजा और उपवास समापन के बाद सुहागिन महिलाओं को उनके पति ने उपहार स्वरूप डायमंड रिंग, सोने के आभूषण और अन्य उपहार भेंट किए। जिन लोगों ने कैंडल नाइट डिनरके लिए होटलों में टेबल बुक करा रखा वह समय से होटलों में पहुंचकर करवाचौथ को यादगारबनाए। इस दौरान खूब सेल्फियां भी ली गईं। वहीं सिनेमाघरों में भी देर रात तक नवविवाहितोंकी जुटान हुई थी। घरों में काटे गए केकबदलते दौर में करवाचौथ के बेहद खास मौके को खास महसूस कराने के लिए नई पीढिय़ों ने कस्टमाइज फोटो युक्त केक काटकर करवाचौथ मनाया।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty