वाराणसी, जेएनएन। आइआइटी, बीएचयू के वार्षिक तकनीकी उत्सव 'टेक्नेक्स-20' की अंतिम निशा जुबिन नौटियाल के नाम रही। तीन दिनी उत्सव के तहत जहां विविध स्पर्धा आयोजित हुई, वहीं थिंक टॉक के तहत आइटियंस ज्ञानवर्द्धक चर्चा के साक्षी बने। वहीं आयोजन में युवाओं की टोली ने भी खूब मनोरंजन किया। 

शाम ढलते ही संस्थान स्थित एडीवी ग्राउंड में डीजे कार्निवोर की धुन पर युवा झूमने लगे। इसके बाद कार्यक्रम की व्यस्तता झेलने वाले छात्र-छात्राओं पर जुबिन का जादू खूब चला। टेक्नेक्स-2020 के अंतिम दिन 'प्रो-नाइट' में जुबिन जैसे ही स्टेज पर चढ़े, तालियों की गडग़ड़ाहट से उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद अपनी खनकती आवाज से जुबिन युवाओं के दिलो-दिमाग पर छाते चले गए। एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति ने समां बांध दिया। 'तम्मा-तम्मा...' व 'हम्मा-हम्मा...' जैसी गीतों ने जहां युवाओं को झुमाया, तो वहीं 'आज की रात होना है क्या...', 'जाम है शाम है...', 'दिल चीज तुझे दे दी...', 'अफगान जलेबी...' आदि गीतों के युवा दीवाने बन गए। 'अच्छा चलता हूं...' गाने के साथ जुबिन ने अपनी प्रस्तुति को विराम दिया तो छात्र सिलसिला आगे बढ़ाने का अनुरोध करने लगे। 'कुछ तो बता जिंदगी...' गाकर सभी को विभोर कर दिया। जुबिन की लोकप्रियता का आलम इस कदर रहा कि सभागार फुल होने के बाद भी प्रवेश द्वार पर चाहने वालों की भीड़ लगी रही। लोगों दूर से ही उनको मोबाइल में कैद करते रहे और गीतों पर झूमते नजर आए। 

न्याय प्रणाली की जटिलताओं से हुए वाकिफ 

इससे पूर्व टेक्नेक्स के तहत थिंक टॉक में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अरिजित पसायत थे। उन्होंने आइटियंस को भारतीय न्याय प्रणाली की जटिलताओं से वाकिफ कराया। कहा वर्तमान युग में देश के बुनियादी मूल्यों को बनाए रखने में न्याय प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका है। तीन दिनी उत्सव के आखिरी दिवस तकनीकी कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहा। सबसे क्रिएटिव योजनाओं में मंयक बंसल व प्रत्युष द्वारा बनाया गया 'बायोनिक आर्म', अभिषेक, लाल नैन व पिनू द्वारा बनाया गया वृहद ड्रोन प्रणाली, यज्ञनेश, याश व कार्तिकेय का फ्रेंडी ब्रेल रहा। 

Posted By: Abhishek Sharma

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