वाराणसी, जेएनएन। लोकनायक जयप्रकाश नारायण सादगी और सरलता का प्रतीक होने के साथ ही क्रांति शोधक नेता भी थे। उन्होंने सत्ता को ठुकरा कर जनसेवा का मार्ग चुना। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने में उनका विशेष योगदान रहा। ऐसे में वे काशी विद्यापीठ की धरोहर हैं। इसे देखते हुए काशी विद्यापीठ ने जेपी चेयर स्थापित करने का निर्णय लिया है, ताकि छात्र उनके व्यक्तित्व व कृतित्व के बारे में जान सकें। इतिहास तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग संयुक्त तत्वावधान में रविवार को आनलाइन जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने की।

'भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन एवं काशी विद्यापीठ विषय पर हुए वेबिनार में नेहरू ग्रामभारती नामित विश्वविद्यालय प्रयागराज के कुलपति प्रो. राममोहन पाठक ने कहा कि काशी विद्यापीठ का उद्देश्य अन्य विश्वविद्यालयों से अलग है। इसकी आत्मा भवन व आधारभूत संरचना में नहीं, उसकी मूल्यानुगत शिक्षा पद्धति में होनी चाहिए। इस संस्था के प्रति हमारे मन में सम्मान का भाव होना अति आवश्यक है। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति (नई दिल्ली) के निदेशक डा. दीपांकर श्रीज्ञान ने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन के मूल में राष्ट्रवाद है। राष्ट्रवाद का प्रादुर्भाव वर्ष 1857 के आंदोलन से हुआ था। गांधी ने सत्याग्रह को राष्ट्रीय आंदोलन का हथियार बनाया। कहा कि गांधी और जेपी ने सिखाया कि राष्ट्र को कैसे एक कर सशक्त किया जाए।

जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय (छपरा-बिहार) के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि प्रार्थना सभा, आर्य समाज और ब्रह्म समाज इन तीनों संस्थाओं के सुधारवादी आंदोलनों द्वारा भारत ने अपनी भारतीयता और मौलिकता को प्राप्त किया है। गांधी अध्ययन पीठ के पूर्व निदेशक प्रो. राम प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का व्यक्तित्व और कृतित्व आदर्शवादी रहा है। स्वागत इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. योगेंद्र सिंह, संचालन डा. विनोद कुमार सिंह, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. शशिदेवी ङ्क्षसह ने किया।

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