जौनपुर, जेएनएन। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में मंगलवार की रात आतंंकवादियों के साथ मुठभेड़ में जिले का वीर सैनिक बलिदान हो गया। जलालपुर थाना क्षेत्र के बहादुरपुर इजरी गांव निवासी जिलाजीत यादव (25) पुत्र स्व. कांता यादव के मां भारती की रक्षा करते वीरगति को प्राप्त होने की खबर लगते ही घर में कोहराम मच गया, लेकिन गर्व से छाती चौड़ी भी हो गई। पार्थिव शरीर गुरुवार की सुबह तक ससम्मान गृह गांव लाए जाने की बात कही जा रही है। 

स्व.कांता यादव के इकलौते पुत्र जिलाजीत यादव सन् 2014 में 53 राष्ट्रीय राइफल्स में सिपाही के पद पर चयनित होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। सैन्य सूत्रों द्वारा बलिदानी जवान के स्वजनों को दी गई जानकारी के अनुसार खुफिया एजेंसियों ने सूचना दी कि पुलवामा जिले के कामराजीपोरा के एक बाग में आतंकी छिपे हुए हैं। इस पर सैनिकों ने पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। खुद को घिरते देख आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी। सैनिकों ने भी गोली का जवाब गोली से दिया। आतंकियों की गोली लगने से जिलाजीत बलिदान हो गए। एक अन्य जवान घायल हो गया। जवाबी कार्रवाई में सैनिकों ने एक आतंकी को मार गिराया। मौके से एके-47 राइफल, ग्रेनेड व अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं मिली हैं, जिसे सेना ने कब्जे में ले लिया है। खबर लिखे जाने तक मुठभेड़ जारी है। स्व. कांता यादव के इकलौते पुत्र के वीरगति प्राप्त होने की खबर लगते ही गांव-जवार में कोहराम मच गया। जिलाजीत की तीन वर्ष पूर्व शादी हुई थी। सात महीने पूर्व पैदा हुआ बेटा पिता के बलिदान हो जाने से अंजान है।

मोबाइल फोन पर देखा था जिगर के टुकड़े का चेहरा

मां भारती की सुरक्षा में प्राणों का बलिदान कर देने वाला बहादुर सैनिक जिलाजीत यादव अपने जिगर के टुकड़े को गोद में लेकर प्यार-दुलार लुटाने की हसरत दिल में लिए ही उस दुनिया में चला गया जहां से कोई लौटकर नहीं आता। दो दिन पहले पत्नी और दुधमुंहे बेटे से पांच दिन बाद छुट्टी लेकर घर आने की बात कहने वाले जिलाजीत को क्या पता था कि यह वादा वह कभी पूरा नहीं कर पाएगा।

 जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों से मुठभेड़ में गोली लगने से वीरगति प्राप्त करने वाला जिलाजीत यादव जलालपुर थाना क्षेत्र के बहादुरपुर (इजरी) गांव निवासी स्व. कांता यादव व उर्मिला देवी का इकलौता बेटा था। मिलनसार और बहादुर जिलाजीत गांव भर का दुलरुआ था। चचेरे भाई आलोक यादव की प्रेरणा लेकर वह भी सेना में भर्ती हुआ था। करीब तीन साल पूर्व जिलाजीत वाराणसी जिले के रामेश्वर थाना क्षेत्र के इन्नरपुर गांव की पूनम यादव (17) के साथ दांपत्य जीवन में बंधा था। गत जनवरी माह में घर आया जिलाजीत की खुशियों का तब पारावार नहीं रहा जब गत फरवरी महीने में उसके ड्यूटी पर रहते पूनम ने बेटे को जन्म दिया। बुधवार की अलसुबह बेटे के बलिदान होने की खबर आते ही मां उर्मिला देवी धाड़ें मारकर रोने लगी। उर्मिला देवी ने सपने में भी नहीं सोचा रहा होगा कि प्रकृति उसके साथ डेढ़ साल के भीतर ही इतनी क्रूर लीला दिखाएगी। पति की मौत के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही उर्मिला देवी पर बेटे की मौत के बलिदान होने की खबर से वज्रपात सा हो गया। स्वजनों के अनुसार जिलाजीत ने मंगलवार की रात जिलाजीत ने पत्नी पूनम से मोबाइल फोन पर वीडियो काल कर बात की थी। फोन पर ही जिलाजीत बेटे जीवांश का वर्चुअल चेहरा देखकर खुशी से खिल उठा था। फोन पर ही प्यार-दुलार लुटाते हुए पत्नी बेटे से पांच दिन बाद छुट्टी लेकर घर आने की बात कही थी।

बलिदानी के घर उमड़ पड़ा पूरा गांव

जिलाजीत के बलिदान होने की खबर गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई। रो-बिलख रही मां उर्मिला, चाचा राम इकबाल, जवाहिर यादव व अन्य स्वजनों को ढांढ़स बंधाने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। रो-बिलख रहे स्वजनों को सांत्वना देने वाले खुद अपनी आंखों से आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। पूरा गांव बलिदानी जिलाजीत का अंतिम बार चेहरा देखने के लिए पार्थिव शरीर आने का इंतजार कर रहा है।

मायके में मिली मांग सूनी होने की मनहूस खबर

बेटे के पैदा होने के बाद से ही मायके में रह रही पूनम काफी खुश थी कि हफ्ते भर के भीतर जिलाजीत छुट्टी लेकर आएगा तो उसे विदा कराकर घर ले जाएगा। कलेजे पर पत्थर रखकर जब ससुरालीजन ने पूनम को जिलाजीत के बलिदान होने की सूचना दी तो वह बेसुध होकर गिर पड़ी। मायके के लोग बेटे संग उसे लेकर ससुराल आए। उसका करुण क्रंदन हर किसी का कलेजा चाक कर रहा है।

 

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