जौनपुर [आनन्द स्वरूप चतुर्वेदी]। स्वतंत्र भारत में जौनपुर विधानसभा क्षेत्र में अब तक कुल सोलह बार चुनावी मुकाबला हुआ है। इसमें सर्वाधिक छह बार कांग्रेस व पांच बार भगवा खेमे (जनसंघ व भाजपा) को सफलता मिली है। इसके साथ ही यह सीट राज्य सत्ता के काफी करीब भी रही है। जौनपुर में सोलह बार चुनाव हो चुके हैं और यहां पर स्टार प्रत्याशियों की बहार रही है। यहां पर शुरू से ही कांग्रेस का भगवा खेमे से कड़ा मुकाबला रहा है।

1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जिले की सभी सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया था। उस चुनाव में इस क्षेत्र से विधायक चुने गए हरगोविंद सिंह प्रदेश के गृहमंत्री रहे। हालांकि अगले ही चुनावी मुकाबले में उतरे राजा यादवेंद्र दत्त दुबे ने यहां कांग्रेस के विजय रथ पर लगाम लगाकर उसे करारा झटका दिया। 1962 के अगले चुनाव में भी इस क्षेत्र से उनकी बादशाहत कायम रही। लगातार हार से आजिज कांग्रेस ने 1967 के चुनाव में बनारस के प्रतिष्ठित औरंगाबाद हाउस से पंडित कमलापति त्रिपाठी को यहां से उतार कर बड़ा दांव खेला। वह जनसंघ के जंगबहादुर यादव को परास्त कर पार्टी के भरोसे को कायम रखने में भी सफल रहे।

हालांकि, इस क्षेत्र में जनसंघ की गहरी पैठ का ही नतीजा रहा कि कांग्रेस का बड़ा चेहरा होने के बावजूद उन्हें महज 1875 मतों से जीत मिली। उन्हें कुल 32752 मत मिले थे। हालांकि जनसंघ के जंगबहादुर यादव ने 1969 के चुनाव में कांग्रेस के विष्णु सहाय को हराकर बदला ले लिया। इसी क्षेत्र से 1974 में पूर्व प्रधानमंत्री रहे चंद्रशेखर के अति निकट रहे ओमप्रकाश श्रीवास्तव विधायक चुने गए जो बाद में प्रदेश के कैबिनेट में भी रहे। 2012 में यहां से विधायक चुने गए नदीम जावेद न केवल कांग्रेस का बड़ा चेहरा रहे, बल्कि गांधी परिवार के करीबी भी माने जाते हैं। पिछले चुनाव में भाजपा से विधायक चुने गए गिरीश चंद्र यादव पहले ही प्रयास में न केवल विधायक चुने गए, बल्कि योगी सरकार में पूरे पांच साल तक राज्यमंत्री भी रहे।

Edited By: Abhishek Sharma