जागरण संवाददाता, वाराणसी : ईशा फाउंडेशन के संस्थापक आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव श्रीकाशी विश्वनाथ के सुंदरीकरण में सहयोग करेंगे। उन्होंने इसके लिए मंदिर प्रशासन को अपना सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जब 2012 में वह काशी आए थे, तो इसको "गंदे शहर" के रूप में देखा था। पीएम नरेंद्र मोदी के वाराणसी से सांसद बनने के बाद पिछले आठ वर्षों में जो परिवर्तन हुआ, वह चमत्कारिक है।

आध्यात्मिक नगरी काशी में अपना आत्मबोध दिवस मनाने आए सद्गुरु जग्गी वासुदेव शनिवार को असम के लिए प्रस्थान कर गए। वहां वह असम सरकार के साथ अपने मिट्टी बचाओ अभियान के तहत जैविक खेती के लिए एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। जाते-जाते सद्गुरु ने अपने देश-विदेश के शिष्यों को इस बार नवरात्र में लिंग भैरवी का देवी अभिषेकम ईशा योग केंद्र से पहली बार सजीव प्रसारित होने की सूचना दी और उसे देखने का आह्वान किया। जग्गी वासुदेव गुरुवार शाम बनारस आए थे। शुक्रवार को उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के साथ वैदिक केंद्र समेत धाम परिसर का अवलोकन किया था।

देवी कृपा प्राप्त करने वाला प्राणी धन्य : सद्गुरु

उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर देवी की कृपा हो जाती है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। देवी की कृपा पाकर आप एक ऐसा जीवन जीने लगेंगे जो आपकी कल्पना, काबिलियत और क्षमताओं से कहीं परे होगा। उन्होंने बताया कि कोयंबटूर में वेल्लियांगिरी तलहटी में स्थित, आठ फीट ऊंची देवी, जो लिंग के रूप में अपनी अभिव्यक्ति में अद्वितीय हैं, दैवीय स्त्री की सबसे असाधारण प्रतिमूर्ति है। भक्तगण नवरात्र अभिषेकम 26 सितंबर, एक अक्टूबर व दाे अक्टूबर को शाम 5:40 बजे से शाम 6:15 बजे तक लिंग भैरवी के यूट्यूब पेज पर देख सकते हैं।

उनके अनुयायियों का कहना है कि सद्गुरु ने 2010 में एक दुर्लभ, रहस्यमय प्रक्रिया के माध्यम से लिंग भैरवी की प्राण-प्रतिष्ठा की थी। एक पत्थर को एक दैव्य अभिव्यक्ति में बदलने के लिए जीवन ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। एक ठोस पारे से बनी नींव के साथ एक शक्तिशाली ऊर्जा रूप, लिंग भैरवी की प्रतिमा दिव्य स्त्री के सभी तीन आयामों को प्रकट करती है, जिसे पारंपरिक रूप से दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में दर्शाया जाता है।

Edited By: Saurabh Chakravarty

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