गांधी जयंती ही नहीं इसी दिन 'स्वदेशी आन्दोलन' के दौरान काशी भी आए थे बापू, कैथी के रास्ते गंगा पार कर पहुंचे थे गाजीपुर
महात्मा गांधी की जयंती पर कैथी में 'स्वदेशी आंदोलन' के दौरान उनके 1929 के आगमन की 97वीं वर्षगांठ मनाई गई। ...और पढ़ें

महात्मा गांधी के कैथी आगमन की 97वीं वर्षगांठ: स्वदेशी आंदोलन की यादें ताजा।
HighLights
97वीं वर्षगांठ पर गांधी जी के कैथी आगमन का स्मरण।
1929 में गांधी जी ने सैदपुर में जनसभा को संबोधित किया।
गांधी संदेश पदयात्रा निकाली गई, उनके विचारों की प्रासंगिकता पर जोर।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर, 2 अक्टूबर को 'स्वदेशी आंदोलन' के दौरान गांधी जी के कैथी आगमन की 97वीं वर्षगांठ मनाई गई। इस अवसर पर गांधी संदेश पदयात्रा का आयोजन किया गया। 1929 में गांधी जी ने कैथी होते हुए सैदपुर की यात्रा की थी, जहाँ उन्होंने एक चबूतरे पर बैठक की थी। इस बैठक में उनके साथ कस्तूरबा गांधी, मीरा बहन, आचार्य कृपलानी, महादेव देसाई, शिव प्रसाद गुप्त, देवदास गांधी आदि उपस्थित थे।
बैठक के बाद, सभी लोग गंगा-गोमती संगम के पास नाव द्वारा नदी पार कर औड़िहार स्थित बराह रूप घाट पहुंचे। वहां संध्या वंदन के बाद, वे सैदपुर नगर के मिडिल स्कूल गए, जहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया और विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। इस अवसर पर गांधी जी के 60वें जन्मदिन का भी उल्लेख किया गया। सैदपुर में गांधी जी के चलने वाले मार्ग को 'गांधी मार्ग' कहा जाता है, जबकि बूढ़े नाथ घाट पर उनकी विश्राम कुटिया भी थी, जिसे घाट के सौंदर्यीकरण के दौरान हटा दिया गया।
गांधी जी के कैथी आगमन की 97वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर, आशा लाइब्रेरी की छात्राओं ने गंगा गोमती संगम तक गांधी संदेश पदयात्रा निकाली। संगम पहुँचकर एक स्मरण सभा का आयोजन किया गया। इस सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ सर्वोदयी कार्यकर्ता ईश्वर चंद्र ने कहा कि गांधी जी की प्रासंगिकता और स्वीकार्यता आज भी पूरी दुनिया में है। हमें उनकी विरासत को संजोने की जिम्मेदारी लेनी होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि कैथी स्थित गंगा गोमती संगम घाट पर गांधी जी के आगमन से संबंधित स्मारक बनाने की आवश्यकता है, ताकि यहाँ आने वाले पर्यटकों को इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी मिल सके। उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के मंत्री काजी फरीद आलम ने कहा कि गांधी जी के कदमों का वास्तविक अर्थ केवल उन भौतिक स्थानों से नहीं है, जहाँ वह गए थे, बल्कि उनके विचारों, आदर्शों और सिद्धांतों के उन पदचिन्हों से है, जिन्हें उन्होंने अपने जीवन और समाज में स्थापित किया।
इस अवसर पर प्रदीप सिंह, सौरभ चंद्र, अमित कुमार, राजकुमार पटेल, बृजेश कुमार, इंदु, दिलीप गिरी, पुष्पा, आँचल, मनोज, अनिता देवी, रमेश श्रीवास्तव आदि की उपस्थिति रही। इस प्रकार, गांधी जी के योगदान और उनके विचारों को याद करते हुए, इस आयोजन ने उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
