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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से अजय राय काे हटाना मास्टरस्ट्रोक या मजबूरी? वाराणसी में चर्चाओं का बाजार गर्म

By Vikas Ojha Edited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 03 Oct 2026 11:37 AM (IST)

कांग्रेस हाईकमान ने अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर आराधना मिश्र मोना को कमान सौंपी है। विधानसभा चुनाव ...और पढ़ें

अजय राय को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया: वाराणसी में राजनीतिक चर्चा तेज।

अजय राय को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया: वाराणसी में राजनीतिक चर्चा तेज।

HighLights

  1. अजय राय को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया गया।

  2. आराधना मिश्र मोना को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया।

  3. विधानसभा चुनाव से पहले यह निर्णय राजनीतिक चर्चा का विषय।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। बनारस‍ियों के बीच चर्चा आम है, बनारस के सांसद और प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में ताल ठोंकने वाले अजय राय को क्‍यों हटाया? कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की कमान अब आराधना मिश्र मोना को सौंप दी है। विधानसभा चुनाव से पूर्व अजय राय को इस पद से हटाया जाना राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हालांकि अजय राय के समर्थक अभी काफी हद तक मौन हैं। उम्मीद जता रहे है कि अजय राय को राष्ट्रीय प्रवक्ता समेत कुछ बड़े पद मिल सकते हैं या कोई और बड़ी जिम्मेदारी। आगे क्या होगा, अभी स्पष्ट नहीं है। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस का यह निर्णय मास्टरस्ट्रोक साबित होगा या गलत कदम। यह तो समय बताएगा। फिलहाल कांग्रेस के प्रदेश स्तर के बड़े नेता स्तब्ध है।

नाम न छापने की शर्त पर यह अवश्य कह रहे हैं कि यह ठीक नहीं हुआ है। यह बात सच है कि अजय राय का कार्य अवधि लगभग पूरा हो गया है लेकिन विधानसभा चुनाव बाद यह निर्णय होना चाहिए था। अजय राय ने कांग्रेस को प्रदेश के कोना कोना में खड़ा किया। सपा के साथ गठबंधन के बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में छह सीटें मिली थी।

इतना ही नहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ उम्मीद से ज्यादा चार लाख से अधिक वोट अपनी झोली में लाकर पूर्वांचल में पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश की थी। दूसरी तरफ आराधना मिश्रा को अध्यक्ष बनाने के पीछे एक तर्क है कि वह ब्राह्मण चेहरा हैं लेकिन इसमें बहुत दम नहीं है क्योंकि अजय राय जो भूमिहार बिरादरी से हैं वह ब्राह्मण के काफी नजदीक हैं। ज

हां तक महिला होने का और भाजपा के महिला आरक्षण कार्ड को कुंद करने का सवाल है तो वह तो समय बताएगा। लेकिन कांग्रेस यह प्रयोग पहले भी कर चुकी है जब प्रियंका गांधी ने लड़की हूं लड़ सकती हूं का नारा दिया था। अजय राय 2023 में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए वह पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद वाराणसी से पहले नेता थे जिनको यह मौका दिया गया।

अजय राय ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने को हर मौके पर साबित भी किया। पार्टी पूरे पूर्वांचल ही नहीं पश्चिमांचल तक भी संगठन और ऊर्जा से पूर्ण हुई। इतना ही नहीं अजय राय ने पूर्वांचल की भूमिहार बिरादरी और पश्चिम के त्यागी को कांग्रेस से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अजय राय विपक्ष के एकमात्र नेता हैं उत्तर प्रदेश में जो लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मुखर होकर के बोलते रहते हैं। कोई ऐसा दिन नहीं होता है जब वह भाजपा सरकार की नीतियों कार्यों और कार्यक्रमों पर हमलावर ना हो। यह जरूर रहा की वह मुखर होने में कई बार मर्यादा को भी लांघ गए जिसे लेकर भाजपा हमलावर रही।

भाजपा को तो कई बार अजय राय के खिलाफ प्रदर्शन तक करना पड़ा। अजय राय ऐसे नेता हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कांग्रेस की राजनीति को उत्तर प्रदेश में जीवित रखने के लिए लगातार प्रयास किया है। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता और जनता के मुद्दों पर संघर्ष करने की उनकी शैली को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन पहले की तुलना में बेहतर हुआ।

पांच बार विधायक, वाराणसी संसदीय सीट से पिछले तीन चुनाव में ठोंक रहे ताल
अजय राय ने वाराणसी की पूर्व की कोलसला विधानसभा सीट से नौ बार विधायक रहे उदल को 1996 में हराकर भाजपा के विधायक बने। वह 2002 और 2007 में भी विपरीत परिस्थितियों में भाजपा से विधायक चुने गए। भाजपा ने 2009 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी संसदीय सीट से अपने राष्ट्रीय नेता डा. मुरली मनोहर जोशी को मैदान में उतारा तो अजय राय ने इसका विरोध करते हुए पार्टी छोड़ दी।

उनके खिलाफ चुनावी मैदान में कूद पड़े अजय राय जीते तो नहीं लेकिन सदस्यता जाने के बाद 2009 में हुए उप चुनाव में निर्दल प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर विधायक बन गए। 2012 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। वह 2014, 2019, और 2024 में लगातार मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में चुनौती दे रहे हैं।