जागरण संवाददाता, वाराणसी : बीएचयू अस्पताल में फर्जी इंटर्न से ड्यूटी कराने के मामले में चिकित्सा विज्ञान संस्थान की ओर से बनाई गई जांच समिति ने जांच पूरी कर ली है। समिति ने मंगलवार शाम करीब तीन बजे संस्थान के निदेशक प्रो. एसके सिंह को जांच रिपोर्ट सौंप दी। अंतिम दिन आरोपित डा. शुभम ने अपना लिखित बयान दर्ज कराया। कहा, उन्होंने किसी दूसरे से इंटर्नशिप के समय ड्यूटी नहीं कराई। इसके लिए सबूत के तौर पर अपनी ड्यूटी की रिपोर्ट व कोर्स पूर्ण होने का प्रमाण पत्र भी सौंपा।

इससे पहले तीन आरोपितों के बयान शनिवार को ही दर्ज कर लिए गए थे। अब निदेशक जांच रिपोर्ट कुलपति प्रो. सुधीर के जैन को सौंपेंगे। इंटर्नशिप में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद जांच के लिए संस्थान ने सर्जरी विभाग के प्रो. संजीव कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। इसमें शामिल प्रो. गुप्ता व जनरल मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. धीरज किशोर, जनरल सर्जरी विभाग की अध्यक्ष प्रो. सीमा खन्ना, एनाटमी विभाग की अध्यक्ष प्रो. रोयना सिंह व आर्थो विभाग के प्रो. अजीत सिंह ने तीन इंटर्न नितिन, सौमिक डे व कृति अरोड़ा से शनिवार को ही बयान ले लिया था।

इस तरह के फर्जीवाड़े पूर्व में भी होने की शिकायतों को देखते हुए पिछले साल इंटर्न कर चुके डा. शुभम से भी पूछताछ की गई। शुभम वर्तमान में बीएचयू रेडियोलाजी विभाग में जूनियर रेजिडेंट प्रथम वर्ष हैं।

फर्जी इंटर्न ने जांच समिति के सामने आने से किया इन्कार

बीएचयू अस्पताल के एमएस प्रो. केके गुप्ता ने बताया कि इंटर्न के नाम पर फर्जी तरीके से चिकित्सा कार्य करते पकड़े गए आरोपितों को पुलिस के हवाले किया गया। वैसे इन आरोपितों ने जांच समिति के सामने आने से मना कर दिया है। अब गेंद सिर्फ पुलिस के पाले में ही है। बीएचयू अस्पताल व ट्रामा सेंटर के विभिन्न विभागों में दूसरे के नाम पर अवैध तरीके से इंटर्न (प्रशिक्षु) बन कर अदलहाट विटुडका मीरजापुर का मोहित सिंह, डब्ल्यूआइई कालोनी गेट अनपरा सोनभद्र का अभिषेक सिंह व विश्वेश्वरगंज की प्रीति चौहान चिकित्सा कार्य कर रही थी।

इनके अनुसार उन्हें इसके लिए 500 से 800 रुपये प्रतिदिन मिलते थे। ये अक्सर ही अस्पताल व ट्रामा सेंटर के इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी करते थे। 18 जनवरी को इसमें से एक एमचीएच विंग में ओपीडी करने पहुंचा था। यहां डा. अमिता दिवाकर की सक्रियता से एक आरोपी को पकड़ लिया गया।

इंटर्न पर नजर रखने की जिम्मेदारी वरिष्ठ चिकित्सकों की

किसी भी मेडिकल संस्थान या कालेज में इंटर्न की पोस्टिंग डीन, डायरेक्टर या प्रिंसिपल कार्यालय से होती है। इसके बाद इंटर्न से काम लेने का जिम्मा संबंधित विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों के पास होता है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के नियमों का हवाला देते हुए सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. केके गुप्ता ने बताया कि वरिष्ठ चिकित्सकों की जिम्मेदारी बनती है कि साथ लगाए गए इंटर्न की कार्यप्रणाली पर नजर रखें।

वार्डों में लगेगी बायोमेट्रिक मशीन फर्जी इंटर्न का मामला सामने आने के बाद इमरजेंसी वार्ड के अधिकारियों की बैठक मंगलवार को चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में हुई। एमएस प्रो. केके गुप्ता ने बताया कि सभी सीएमओ, एसएमओ व एमओ को कड़ाई से हर स्टाफ की निगरानी का निर्देश दिया गया है ताकि इस तरह की गलती दोबारा न हो। शताब्दी सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक स्थित इमरजेंसी वार्ड में बायोमेट्रिक मशीन पहले से लगी है। अन्य स्थानों पर इसे लगाया जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी से बचा जा सके।

Edited By: Nitesh Srivastava

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट