वाराणसी, जेएनएन। International Day of Action for Women's Health कोविड -9 से लड़ाई में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले अधिक जीवटता दिखाई है। हार्मोन व जींस सुरक्षा कवच से लैस महिलाओं पर वायरस ज्यादा असर नहीं डाल पा रहा है। महिलाओं का सफाई पसंद होना व स्वच्छता भी उन्हें बीमारी से बचा रहा है। बनारस में बुधवार तक कोरोना के कुल 160 मामले दर्ज थे। इनमें से अब तक चार मौतें हो चुकी हैं, जिनमें तीन पुरुष व केवल एक महिला रही।

अंतरराष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य दिवस का मकसद महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण मसलन यौन एवं प्रजनन तथा अधिकारों से जुड़े मुद्दों के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की प्रतिरोधक क्षमता कई मामलों में बेहतर होती है। वायरस के पुरुषों को ज्यादा शिकार होने की एक वजह जिंदगी जीने का तौर-तरीका भी है। जो लोग गुटखा, तंबाकू या सिगरेट का सेवन करते हैं, उनमें किसी भी बीमारी के पनपने की आशंका अधिक होती है। सिगरेट पीने वालों के लिए तो किसी भी तरह के संक्रमण का शिकार होना बेहद आसान है। हालांकि महामारी के दौर में इस तरह के दावे के पक्ष में कोई ठोस सबूत नहीं हैं। वाराणसी में 27 मई तक कोरोना के 160 मामले दर्ज थे, इनमें सिर्फ 26 महिलाएं हैं।

शिक्षा के साथ जागरूकता का अभाव

प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रो. अनुराधा खन्ना के मुताबिक स्वच्छता व जागरुकता किसी भी बीमारी का प्रसार रोकने में बेहद कारगर साबित होता है। इस मामले में महिलाओं को समय-समय पर शिक्षित किया जाता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिला है। मगर अभी भी मेंस्ट्रुअल हाइजीन सहित यौन शिक्षा, स्वच्छता आदि को लेकर जागरुकता बढ़ाने की जरूरत है। पुरुषों के मुकाबले गृहणियां अधिक सजग हैं, शायद यही वजह है कि वे संक्रमण की जद में कम आ रही हैं।

ये हैं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी अधिकार

- लैंगिकता के बारे में जानकारी।

- यौन शिक्षा।

- अपने साथी का चुनाव।

- यौन सक्रियता अथवा यौन असक्रियता का निर्णय।

- इस बात का निर्णय करना, कि कब बच्चा पैदा करना हैं।

- आधुनिक गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग।

- प्रसूति देखभाल का उपयोग।

- सुरक्षित गर्भपात और गर्भपात के बाद देखभाल।

- यौन संचारित रोगों और संक्रमण की रोकथाम, देखभाल और उपचार के बारे में जानकारी जानना।

बायोलॉजिकल फैक्टर रखता है मायने

ख्यात वायरोलॉजिस्ट प्रो. सुनीत कुमार सिंह के मुताबिक महिला या पुरुष के संक्रमित होने में बायोलॉजिकल फैक्टर्स (होस्ट एवं वायरस) का प्रभाव रहता है। दोनों के बीच इम्यूनोलॉजिकल व हार्मोनल डिफरेंस हैं। साथ ही होस्ट की शारीरिक दशा और वायरस फैक्?टर यानी वायरस का कितना डोज (इनोकुलम) शरीर में प्रवेश कर गया, यह भी मायने रखता है। महिलाएं परिवार की अहम सदस्य होती हैं। बच्चों को साफ-सफाई के प्रति जागरुक करना एवं उनके खान-पान में पौष्टिकता का ध्यान रखना इनका ही काम होता है। शायद यही वजह है कि कई सारी बीमारियों से खुद को दूर रखने में कामयाब हो जाती हैं।

...तो इसलिए कोरोना से कर रहीं कड़ा मुकाबला

 डिपार्टमेंट ऑफ मॉलीकुलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स-बीएचयू की प्रो. गीता राय के मुताबिक महिलाओं में दो एक्स क्रोमोसोम होता है। दूसरा एक्स- क्रोमोसोम कई बार शरीर साइलेंस कर देता है, मगर जो साइलेंस नहीं हो पाते उनमें इम्यूनोलॉजिकल जीन डबल डोज में हो जाते हैं। इसलिए उनका इम्यून रिस्पांस ज्यादा असरकारी हो जाता है। एमआइ-आरएनए (माइक्रो- राइबो न्यूक्लिक एसिड) इम्यून फंक्शन को संचालित करने के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह वाई-क्रोमोसोम में नहीं मिलता, एक्स में अधिक मिलता है। एमआइ- आरएनए ज्यादा होने पर यह इम्यून फंक्शन के संचालन को बेहतर कर देते हैं। वहीं महिला व पुरुष के बीच हार्मोन डिफरेंस भी अहम रोल अदा करते हैं। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन हावी रहता है। इसकी अधिकता इम्यून रिस्पांस को कम कर देती है, जबकि महिलाओं में पाया जाने वाला एस्ट्रोजन हार्मोन आइएसएन (एंटीवायरल) का उत्पादन बढ़ाता है। इन्हीं आधार पर कोरोना के मामले में भी कयास लगाए जा रहे हैं कि महिलाएं इससे बेहतर तरीके से लड़ रही हैं। हालांकि अभी इसे वैज्ञानिक तौर पर पुष्ट नहीं किया जा सका है।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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