चंदौली [मनोज सिंह]। चंद्रप्रभा अभयारण्य में भालुओं के कुनबे की बढ़ती संख्या इंसानी बस्तियों पर संकट खड़ा कर रहा है। भालू वन्य जीव गाव के सिवान व बस्तियों में पहुंच फसलों को तो निवाला बना ही रहे, मनुष्यों पर भी हमला करने से बाज नहीं आ रहे। वर्ष 2016 की गणना में अभयारण्य क्षेत्र में भालुओं की उपस्थिति का आकड़ा 104 रहा। वर्ष 2009-10 में इनकी गिनती 85 से 90 के करीब थी। पिछले दो वर्षों से वन्य जीवों की गणना नहीं कराई गई है।

96000 हेक्टेअर में फैला वन क्षेत्र : काशी वन्य जीव प्रभाग लगभग 96000 हेक्टेअर क्षेत्रफल में फैला है। हाल के वषरें में वनों के दोहन से वन क्षेत्र का दायरा कम हुआ है। वन क्षेत्र की 3338.073 हेक्टेअर भूमि अतिक्त्रमण की जद में है। इसमें लगतार बढ़ोत्तरी ही हो रही। वनों के सिमटते क्षेत्रफल के कारण वन्य जीवों के आहार विहार में बाधा उत्पन्न हुई है। फलदार वृक्षों व जल श्रोतों की कमी के कारण वन्य जीव बस्तियों की ओर कूच कर रहे हैं। हालाकि वन विभाग ने सितंबर 2016 से दिसंबर 2017 तक 528.74 हेक्टेअर भूमि से अतिक्त्रमण हटाने का प्रयास किया है। बावजूद इसके हजारों हेक्टेअर वन क्षेत्र आज भी अतिक्त्रमण से घिरा हुआ है।

बाघ की ना मौजूदगी बढ़ा रही कुनबा : अभयारण्य क्षेत्र में बब्बर शेर व बाघ की कमी ने अन्य प्रकार के वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि की है। अस्सी के दशक में अभयारण्य में बाघ व बब्बर शेर का कुनबा निवास करता था। मगर आज ढूंढऩे से भी इनकी उपस्थिति नहीं मिलती। 2016 की गणना में गुलदार यानि तेंदुआ की संख्या मात्र तीन पाई गई है।

अभयारण्य में वन्य जीवों की संख्या : वर्ष 2016 में कराई गई वन्य जीवों की गणना में गुलदार (तेंदुआ) 3, चिंकारा 123, घड़रोज 174, सांभर 101, भालू 104, सुअर 266, बंदर 445, लंगूर 335, मगर 3, भेडिय़ा 3, लकड़बग्घा 55, लोमड़ी 102, सियार 175, मोर 150, शाही की संख्या 68 है। वन्य जीवों को बस्तियों में जाने से रोकने को अभयारण्य क्षेत्र में पत्थर की दीवारें बनाई गई है। वनों में आहार की कमी के कारण वन्य जीव बस्तियों में पहुंच रहे। सूचना मिलने पर वन्य जीवों को वनों में पकड़कर छोड़ा जाता है।-बृजेश पाण्डेय, वन क्षेत्राधिकारी चंद्रप्रभा रेंज। वन्य जीवों की प्रत्येक वर्ष मई व जून माह में गणना कराई जाती है। वन्य जीवों के बस्तियों में पहुंचने की रोकथाम को उपाय किए जा रहे हैं।-मनोज खरे, डीएफओ काशी वन्य जीव प्रभाग।