वाराणसी, जागरण संवाददाता। तेजी से बढ़ रहे गंगा के जलस्तर की गति बुधवार सुबह के बाद से थोड़ी नरम पड़ गई। मंगलवार रात 80 मिली प्रति घंटा के वेग से बढ़ रहा पानी सुबह आठ बजे के बाद 30 मिली प्रति घंटा पर आ गया। इससे तटवासियों ने राहत की सांस जरूर ली है लेकिन जल स्तर में वृद्धि का खतरा अभी टला नहीं है। बीते 24 घंटों में जलस्तर में 1.62 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मंगलवार सुबह आठ बजे से रात आठ बजे के बीच 12 घंटों में ही पानी 1.56 मीटर बढ़ गया था। डेढ़ मीटर से अधिक पानी के बढ़ने का आलम यह कि घाट की सभी सीढ़ियां डूब गईं, घाटों का आपस में संपर्क भंग हो गया और शाम को आरती का स्थल बदलकर छत पर ले जाना पड़ा। गंगा के हरहराते जल को देख लोगों में बाढ़ को लेकर धुकधुकी बढ़ गई। रात में तो जलस्तर में वृद्धि का सिलसिला और तेज हो गया। 80 मिली प्रति घंटा के वेग से बढ़ते पानी की ऊंचाई बुधवार की सुबह तक 12 घंटों में 1.28 मीटर बढ़कर 66.90 मीटर पहुंच गई।

 सुबह के बाद शाम के आठ बजे तक 12 घंटों में जलस्तर के बढ़ाव में कमी दर्ज की गई और यह 40 सेमी बढ़कर 67.30 मीटर तक आ गया। जलस्तर में वृद्धि का वेग भले थोड़ा कम हुआ है लेकिन गुरुवार के बाद से मौसम विभाग द्वारा जारी वर्षा की संभावना को लेकर खतरा अभी कम नहीं हुआ है। नदी के जलस्तर के बढ़ने की यही गति रही तो गुरुवार को इसका प्रवाह वरुणा और असि में भी पलट प्रवाह के रूप में दिख सकता है। राजघाट पर बाढ़ का चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर है। यानी वर्तमान जलस्तर चेतावनी बिंदु से महज 3.02 मीटर नीचे रह गया है।

Edited By: Saurabh Chakravarty