वाराणसी, जागरण संवाददाता। रघुवर नगर कालोनी निवासी डा. सपना गुप्ता दत्ता की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपित देवर अनिल दत्ता व उसके नौकर रौशन चौधरी को सिगरा पुलिस ने गुरुवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। इस मामले में महिला चिकित्सक के आरोपित ससुर डा. रजनीकांत दत्ता व दो देवर अमित दत्ता व डा. आशीष दत्ता से पुलिस पूछताछ कर रही है। वहीं पोस्टमार्टम के बाद डा. सपना के शव का शाम मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके पति डा. अंजनी दत्ता ने दी। इस दौरान उनकी दो पुत्रियों व आगरा से आए भाई मनोज गुप्ता व संबंधियों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। भाई मनोज ने बताया कि उन्हें क्या मालूम था कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि उनकी बहन की हत्या कर दी जाएगी। घटना के बाद डा. अंजनी दत्ता के आवास पर पुलिस की तैनाती की गई है। क्लीनिक को भी फिलहाल बंद कर दिया गया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों की आवास पर आवाजाही लगी रही।

मां 20 साल तक बहुत बर्दाश्त की

पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंची देवर के हाथों मारी गई डा. सपना की बड़ी बेटी ने वहां मौजूद अपने परिचितों से कहा कि अंकल मेरी मां ने 20 साल तक बर्दाश्त की। मां जबाब देना जानती थीं, लेकिन पापा के कारण शांत रहना पसंद करती थी। पापा भी मां की बातों पर विशेष ध्यान नहीं देते थे। मां तो हमेशा विवाद से दूर रहना चहती थी। अंकल क्या करेंगे इसकी कभी कल्पना नहीं की। खैर, अब आगे के लिए सोचना पड़ेगा। इस दौरान कुछ पल के लिए वह खामोश हो गई। इसके बाद सीधे कार के पिछले सीट पर जाकर बैठ गई। उसके गाड़ी में जाकर बैठने के बाद साथ में मौजूद चार लोग भी गाड़ी में चले गए। इस बीच उनकी छोटी बेटी दूसरी कार से पहुंची। कुछ देर कार के भीतर बैठी बहन से बात की। फिर एक कार में दोनों बहन बैठकर चली गईं। डा. सपना के पति पोस्टमार्टम हाउस पर अलग थलग पड़े रहे। पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे दो रिश्तेदार आपस में बातचीत के दौरान चर्चा कर रहे थे कि डाक्टर ने प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद परिवारीजन की नाराजगी कम होने की जगह बढ़ती गई। इसका खामियाजा सपना को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

मकान बनने के साथ परिवार में शुरू हो गई थी कलह

परिवार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक करीब दो दशक पूर्व डा. रजनीकांत ने डेढ़ करोड़ में संत रघुवर नगर में प्लाट खरीदा था। इस पर तीन मंजिला मकान बना जिसमें तीसरे अनिल के अलावा चारों पुत्र रहते थे। यही मकान विवाद का जड़ बना। डा. रजनीकांत खुद चिकित्सक थे तथा कांग्रेस से विधायक भी रह चुके थे। इसके अलावा सामाजिक क्षेत्र में भी बड़ा नाम थे, लेकिन परिवार में संपत्ति का विवाद छिड़ा तो इसे सुलझा नहीं पाए। आरोपित देवर अनिल अविवाहित है और वह शकरकंद की गली स्थित मकान में रहता था। डा. रजनीकांत के तीन पुत्रों ने अंतर जातीय विवाद किया था।

 

Edited By: Saurabh Chakravarty