वाराणसी में नवरात्र की रौनक: पूजा सामग्री बाजार में बढ़ी चहल-पहल, लाल या पीली चुनरी कौन सी शुभ?
वाराणसी के दुर्गाकुंड बाजार में शारदीय नवरात्र के लिए पूजा सामग्री की रौनक बढ़ गई है, जहां चुनरी, माला और ...और पढ़ें

शास्त्रीय विधान लाल चुनरी को प्राथमिकता देता है।
HighLights
वाराणसी के दुर्गाकुंड बाजार में नवरात्र की रौनक।
पूजा सामग्री के दामों में मामूली वृद्धि देखी गई।
लाल या पीली चुनरी को लेकर भक्तों में असमंजस।
जागरण संवाददाता, वाराणसी : दुर्गाकुंड बाजार शारदीय नवरात्र के उल्लास में रंगने लगा है। कहीं लाल-पीली चुनरियों की छटा है तो कहीं गुड़हल की मालाओं की लालिमा। नारियल, पूजन थाली और कलश स्थापना की सामग्री से सजी दुकानों पर खरीदारी शुरू हो गई है। महिलाओं के बीच सबसे बड़ी समस्या पीली या लाल चुनरी को लेकर है।
मां कूष्मांडा देवी मंदिर के दक्षिणी हिस्से में लगी दुकानों से भक्त घरों में कलश स्थापना और पूजा पंडालों की सजावट के लिए सामग्री जुटा रहे हैं। इस बार सजावटी वस्तुओं के दाम पिछले वर्ष की तुलना में पांच से 10 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इसके पीछे बाजार में छाई महंगाई जिम्मेदार मानी जा रही है। हालांकि कीमतों में अधिक फर्क नहीं होने की वजह से बाजार सामान्य ही है।
बाजार में गुड़हल की माला 20 से 200 रुपये तक, दौना पत्ती की माला 50 से 60 रुपये और नारियल लगभग 50 रुपये का मिल रहा है। चुनरी की कीमत 10 रुपये से शुरू है। कढ़ाई और बेल-बूटे वाली दो मीटर की चुनरी 1500 रुपये तक की है, जबकि पूजन थाली 250 रुपये में उपलब्ध है। जबकि शास्त्रीय विधान के अनुसार लाल चुनरी ही मां को चढ़ाई जाती है।
दुकानदार राजकुमारी देवी ने बताया कि आश्विन नवरात्र में गुड़हल की आवक कम रहती है। इसी कारण इसके दाम चैत्र नवरात्र की तुलना में बढ़ जाते हैं। हालांकि थोक बाजार में कीमतों में अधिक इजाफा नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे बाजार की रणनीति काम करती है। माह भर पूर्व चुनरी खरीदने वाले अधिक कीमतों में इसे उपलब्ध करा रहे हैं। बजकि हवन और पूजा का पूरा बाजार इसबार सामान्य ही है।
