पूर्वांचल तक पहुंचा अर्नब चक्रवात का असर, बचाव के लिए कृषि विभाग ने जारी किया अलर्ट
चक्रवात अर्नब का असर पूर्वांचल, विशेषकर वाराणसी में दिखना शुरू हो गया है, जहां तेज हवाओं और भारी बारिश की ...और पढ़ें

अर्नब चक्रवात का पूर्वांचल पर असर: वाराणसी में किसानों के लिए कृषि विभाग का अलर्ट जारी।
HighLights
चक्रवात अर्नब से पूर्वांचल में तेज हवाएं, भारी बारिश की चेतावनी।
कृषि विभाग ने किसानों को धान बचाने, बुवाई टालने की सलाह दी।
नुकसान होने पर 72 घंटे में फसल बीमा क्लेम करें किसान।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। चक्रवात का असर मंगलवार की दोपहर दो बजे तक सोनभद्र के रास्ते वाराणसी तक असर करने लगा। बादलों की हल्की सक्रियता के साथ ही हवाएं धीरे धीरे तेज होने लगी हैं। माना जा रहा है कि रात तक स्थितियां बारिश की ओर हो सकती हैं।
वहीं कृषि विभाग भी अलर्ट है और बताया कि अगले तीन दिनों का मौसम बदलने वाला है। चक्रवाती तूफान अर्नब के आशंका में कृषि विभाग ने वाराणसी में किसानों को अलर्ट रहने के लिए कहा है। 40 से 50 किलोमीटर तक तेज हवा चलने की जहां आशंका है, वहीं 28 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच तेज गरज के साथ भारी वर्षा की भी चेतावनी है। जिन किसानों के धान की फसल कट चुकी है, उसे बचाने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने के लिए कहा है।
अर्नब तूफान की वजह से 27 अक्टूबर की देर रात से लेकर 28 अक्टूबर बुधवार तक मौसम में बदलाव दिखेगा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इन दो दिनों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। वाराणसी के साथ ही आसपास के 16 जिलों में बारिश की भी चेतावनी है।
ऑरेंज अलर्ट के बीच 1 नवंबर तक स्थिति ऐसी ही बने रहने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है। जनपद में 40000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में बोई गई धान की फसल में से अधिकांश कट चुकी है। किसानों ने धान को इकट्ठा करके रखा है। ऐसे में यदि बारिश हुई तो धान की फसल को बड़ी मात्रा में नुकसान पहुंचाने की संभावना है।
जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह ने बताया कि जिन किसानों का धान खुले में रखा है। उसे तिरपाल से ढंक दे। यदि संभव हो तो उसे सुरक्षित करें। धान को कवर करना जरूरी है। कहां कि खेतों में सरसों, मटर की बुआई यदि संभव हो तो दो से तीन दिन के लिए टाल दिया जाए।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि यदि बारिश से धान को नुकसान पहुंचता है तो किसानों को फसल बीमा का भी लाभ मिलेगा। किसानों को तत्काल ही टोल फ्री नंबर 14447 पर फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करानी होगी। यह शिकायत नुकसान के 72 घंटे के अंदर दर्ज करानी होगी। इसके बाद वह विकास भवन स्थित कमरा नंबर 402 में कृषि विभाग के ऑफिस में भी आवेदन कर सकते हैं।
किसानों को उनकी फसल का मुआवजा जल्द से जल्द दिया भी जाएगा। लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है कि वह अपनी फसल को लेकर सतर्क रहें। बीमा के दायरे में सिर्फ वही किसान आएंगे जिनकी जिनका धान कटाई के बाद खुले में रखा है। खेत में खड़ी फसल पर धनराशि देय नहीं होगी।
