वाराणसी, जेएनएन। जनपद में पिछले कई वर्षों से बालू खनन का कोई भी पट्टा नहीं हुआ है। इसके बावजूद गंगा किनारे सरसवल बलुआ घाट पर बड़े पैमाने पर खनन हो रहा है। इससे आसपास के किसानों की जमीन के लिए खतरा पैदा हो गया है वहीं प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है। इसमें पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है। 

क्षेत्र के अनिल कुमार, अमित सिंह व संदीप मिश्रा आदि ने जिलाधिकारी से शिकायत किया कि एक कंपनी के लोग सरसवल बलुआघाट पर पोकलेन मशीन से दिन-रात खनन कर रहे हैं। गंगा से सटे हिस्से में खनन में 80 फीसद बालू और शेष मिट्टी होती है। हाइवा से ढुलाई कर उसे 10 हजार रुपये प्रति गाड़ी के हिसाब से बेचा जा रहा है। खनन से बने गड्ढे में समीप की जमीनों के समा जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। साथ ही ओवरलोड वाहनों के आने जाने से गांवों की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। खनन कार्य में संलिप्त लोगों से जब शिकायत की गई तो वे धमकी देने लगे। इसकी सूचना जिला खनन कार्यालय में दी गई लेकिन खनन अधिकारी के तीन सप्ताह से अधिक समय से कार्यालय नहीं आने के कारण कोई संज्ञान नहीं लिया गया। लोगों ने स्थानीय पुलिस से भी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे इससे थक कर लोगों ने जिलाधिकारी से शिकायत किया। 

एक गाड़ी से 1820 रुपये का घाटा

दस चक्का हाइवा में कम से कम 28 घन मीटर बालू-मिट्टी लोड होता है। वहीं एक घन मीटर खनन के लिए 65 रुपया रायल्टी जमा करने का नियम है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ऐसी स्थिति में प्रति गाड़ी 1820 रुपये के राजस्व की चोरी हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रतिदिन करीब दो से तीन सौ हाइवा बालू-मिट्टी लदी दो से तीन सौ गाडिय़ां पास होती हैं। इस प्रकार प्रतिदिन चार से पांच लाख रुपये के राजस्व की क्षति मात्र एक स्थान के अवैध खनन से हो रहा है।  

 

व्यक्तिगत कार्य के लिए 10 ट्राली की छूट

शासन ने व्यक्तिगत कार्य जैसे मकान में डालने, खेत समतल करने आदि के लिए 10 ट्राली मिट्टी खनन और ढुलाई की छूट प्रदान की है। इसके लिए कोई रायल्टी नहीं देनी होती है। इससे अधिक खनन करने पर नियम के अनुसार रायल्टी जमा करना होता है।

Posted By: Abhishek Sharma

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