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रूस में ब्रिक्स-2026 सम्मेलन में आइआइटी बीएचयू के प्रो. कमलेश कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग पर शोध

By abhishek sharma Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 25 Sep 2026 12:50 PM (IST)

आईआईटी बीएचयू के प्रो. कमलेश कुमार सिंह ने रूस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स सम्मेलन में ई-कचरा पुनर्चक्रण पर अपना शोध ...और पढ़ें

प्रो. कमलेश सिंह ने रूस में ब्रिक्स सम्मेलन में ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग शोध से बढ़ाया मान।

प्रो. कमलेश सिंह ने रूस में ब्रिक्स सम्मेलन में ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग शोध से बढ़ाया मान।

HighLights

  1. प्रो. कमलेश सिंह ने रूस में ई-कचरा पुनर्चक्रण शोध प्रस्तुत किया।

  2. शोध में ई-कचरे से 100% तांबा, 92% सोना पुनर्प्राप्त किया।

  3. सतत पर्यावरण प्रबंधन हेतु एकीकृत पुनर्चक्रण प्रक्रिया पर जोर।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), वाराणसी के धातुकर्म अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. कमलेश कुमार सिंह ने रूस के नालचिक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन ज‍ियो सस्‍टेन‍ब‍िल‍िटी ब्र‍िक्‍स में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण पर अपना शोध प्रस्तुत किया।

23 से 25 सितंबर तक आयोजित इस सम्मेलन का विषय “वैश्विक बदलाव के दौर में भू-भौतिकीय प्रक्रियाएं, पर्यावरणीय स्थिरता और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण प्रबंधन” था। सम्मेलन में ब्रिक्स देशों तथा अन्य सहभागी देशों के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका आयोजन कबार्डिनो-बालकारियन स्टेट यूनिवर्सिटी और हाई-माउंटेन जियोफिजिकल इंस्टीट्यूट ने किया था तथा इसे रूस के ब्र‍िक्‍स एक्‍सपर्ट काउंस‍िल का आधिकारिक सहयोग म‍िला था।

प्रो. कमलेश कुमार सिंह को सम्मेलन में प्लेनरी वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। साथ ही उन्हें सम्मेलन की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समिति का सदस्य भी बनाया गया। केबीएसयू की ओर से भेजे गए आमंत्रण में धातुकर्म अभियांत्रिकी, ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग, महत्वपूर्ण धातुओं के निष्कर्षण और सतत संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में उनके शोध अनुभव का विशेष उल्लेख किया गया था। सम्मेलन की वेबसाइट पर भी प्रो. सिंह को इंटरनेशनल बोर्ड आफ एक्‍सपर्ट में शामिल किया गया है।

उन्हें सतत धातुकर्म, निष्कर्षण तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी के क्षेत्र में कार्य करने वाले विशेषज्ञ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। प्रो. कमलेश कुमार सिंह की इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी से ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग, मूल्यवान धातुओं की पुनर्प्राप्ति और सतत संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में आइआइटी बीएचयू के शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

प्रो. सिंह ने “Recycling of electronic waste for sustainable environmental management” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। शोध में इलेक्ट्रॉनिक कचरे से मूल्यवान धातुओं की पुनर्प्राप्ति के लिए एकीकृत पुनर्चक्रण प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अध्ययन के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक कचरे में सीसा, पारा, कैडमियम और ब्रोमिनयुक्त एपॉक्सी रेजिन जैसे विषैले पदार्थ पाए जाते हैं। वहीं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगे Printed Circuit Boards (PCBs) सोना, चांदी, तांबा और टैंटलम जैसी मूल्यवान धातुओं के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

शोध में डिलैमिनेटेड पीसीबी से लीचिंग और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन प्रक्रियाओं के माध्यम से 100 प्रतिशत कॉपर और 92 प्रतिशत गोल्ड की रिकवरी प्राप्त की गई। इसके अलावा टैंटलम कैपेसिटर से 99 प्रतिशत मैंगनीज की रिकवरी की गई, जिसकी शुद्धता 99.6 प्रतिशत रही। अध्ययन में चांदी सहित अन्य धातुओं को भी अलग-अलग प्राप्त करने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। शोध में बहुत कम मात्रा यानी पीपीएम स्तर पर मौजूद धातुओं की रिकवरी के लिए पॉलिमर इंक्लूजन मेम्ब्रेन तकनीक का भी अध्ययन किया गया। इसे धातु आयनों की रिकवरी के लिए प्रभावी पाया गया।

प्रो. सिंह के शोध में इलेक्ट्रॉनिक कचरे से विभिन्न मूल्यवान पदार्थों की अधिकतम रिकवरी के लिए हाइड्रोमेटलर्जी, बायो-हाइड्रोमेटलर्जी, इलेक्ट्रो-विनिंग, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन और पॉलिमर इंक्लूजन मेम्ब्रेन जैसी तकनीकों को एकीकृत रूप से अपनाने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य संसाधनों की अधिकतम पुनर्प्राप्ति के साथ सतत पर्यावरण प्रबंधन में जीरो-वेस्ट की दिशा में आगे बढ़ना है।

सम्मेलन में रूस, ब्राजील, चीन, भारत, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की और उज्बेकिस्तान सहित विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, भू-भौतिकीय प्रक्रियाओं, पर्यावरणीय स्थिरता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरणीय निगरानी और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर ब्राजील, चीन, भारत, उज्बेकिस्तान और तुर्की के वैज्ञानिकों ने प्लेनरी सत्रों में अपने शोध प्रस्तुत किए। इनमें जलवायु शासन, कार्बन बाजार, चरागाहों के क्षरण की निगरानी, भूमि-वायुमंडल अंतर्संबंध और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण जैसे विषय शामिल रहे।