वाराणसी, जेएनएन। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि शांति के मार्ग पर चलने के लिए बौद्ध धर्म को जानना होगा और इसके लिए बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली आना होगा। काशी प्राचीन नगरी और सारनाथ बुद्ध की तपोस्थली है।

सारनाथ पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सारनाथ बौद्ध नगरी के साथ अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल है, इसे काशी से अलग नहीं किया जा सकता। जब भी प्राचीन नगरी काशी के विकास की बात होगी तो सारनाथ भी उसमें शामिल होगा। पर्यटकों की हर सुविधा को ध्यान में रखते हुए सारनाथ का विकास होगा।

दो दिनी प्रवास पर बनारस आए पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल पत्नी पुष्पलता के साथ दोपहर सारनाथ स्थित पुरातात्विक संग्रहालय पहुंचे। अधीक्षण पुरातत्वविद् नीरज सिन्हा एवं डा. नीतेश सक्सेना ने स्वागत किया। संग्रहालय के मुख्य हाल में रखे देश के राष्ट्रीय चिह्न सिंह शीर्ष देखते ही मंत्री बोल उठे, 'वाह'। डा. नीरज सिन्हा ने संग्रहालय में रखे पुरावशेषों की जानकारी दी। इस दौरान पर्यटन मंत्री ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से बने संग्रहालय सभागार का फीता काटकर उद्घाटन किया। साथ ही पुरातात्विक खंडहर परिसर को भी देखा।

सड़क सुधार के लिए करेंगे एनएचएआइ से बात

केंद्रीय मंत्री ने मीडिया से बातचीत में वाराणसी में खराब सड़कों को लेकर कहा कि इसकी मरम्मत के लिए एनएचएआइ के अधिकारियों से बात की जाएगी। पुरातात्विक खंडहर परिसर में तैयार लाइट एंड साउंड सिस्टम के शुरू होने के बाबत कहा कि एक सप्ताह में इसे शुरू कराने का प्रयास करेंगे। सारनाथ भ्रमण से पूर्व वह केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान पहुंचे। कुलपति प्रो. नवांग सामतेन एवं कुलसचिव डा. आरके उपाध्याय एवं सहायक सचिव प्रमोद सिंह ने पर्यटन मंत्री का स्वागत किया। प्रो. नवांग सामतेन ने तिब्बती शिक्षा के साथ ही छात्रों की संख्या, उनको दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दी।

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