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मैने वाराणसी में नरेन्द्र मोदी को टक्कर दी थी, भला मैं क्यों भाजपा में जाऊंगा : अजय राय

By Sanjay MishraEdited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 22 Oct 2026 05:29 PM (IST)

अजय राय ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद सपा गठबंधन में अवरोधक होने से इनकार ...और पढ़ें

अजय राय का बयान: सपा गठबंधन पर रुख और कांग्रेस की रणनीति।

अजय राय का बयान: सपा गठबंधन पर रुख और कांग्रेस की रणनीति।

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जागरण संवाददाता, वाराणसी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाए गए अजय राय इस बात से इन्कार करते हैं कि सपा के साथ गठबंधन में अवरोधक बनने के कारण उन्हें पद गवांना पड़ा। वह कहते हैं कि कोई भी अध्यक्ष अपनी पार्टी के लिए काम करता है। उसका लक्ष्य अपनी पार्टी को मजबूत करना और आगे बढ़ाना होता है। हमने भी वही किया।

एक बात जरूर कहूंगा कि अभी सपा से गठबंधन हुआ नहीं है तो उसका विरोध करने की बात कहां से आ गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जाने, सपा से गठबंधन में अवरोधक माने जाने और नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा के पदग्रहण के पूर्व प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुए विवाद सहित विभिन्न विषयों पर अजय राय ने दैनिक जागरण से बातचीत में अपनी राय रखी। प्रस्तुत हैं महत्वपूर्ण अंश-

प्रदेश कांग्रेस की नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा के पदग्रहण के पूर्व प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में जो विवादित घटनाक्रम हुआ उसे आप क्या मानते हैं?

-मेरे लिए भी यह अप्रत्याशित घटनाक्रम था। इससे वास्तव में मैं दुखी हुआ। नए अध्यक्ष के पदग्रहण का मौका था तो उसमें किसी को भी किसी भी तरह का विवाद नहीं करना चाहिए था। यह कांग्रेस की परंपरा के भी खिलाफ है।

तो क्या यह विवाद आपके खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र के तहत किया गया? कौन लोग थे इसके पीछे?

-उस घटना की जांच केंद्रीय नेतृत्व द्वारा गठित समिति कर रही है। वह ढूंढ़ निकालेगी कि किन लोगों ने हंगामा और अपमानजनक आचरण किया। मैं किसी का नाम क्यों लूं।  मुझे जो कहना था वह समिति तो लिखकर दे चुका हूं। वे ही तय करेंगे कि किसने हंगामा किया या कराया। उनका निष्कर्ष आने दीजिए, सब पता चल जाएगा।

आरोप तो यह भी लगाया जा रहा है कि आपके साथ कुछ बाहरी लोग (जो कांग्रेस कार्यकर्ता नहीं हैं) प्रदेश कार्यालय में गए थे और उन्होंने विवाद बढ़ा दिया?

- यह पूरी तरह निराधार है। वहां का वीडियो देख लीजिए तो पता चल जाएगा कि हमने तो कुछ नहीं किया बल्कि जानबूझकर हमारे साथ दुर्व्यवहार किया गया। मेरे समर्थकों को उकसाने का प्रयास किया गया। जांच समिति की रिपोर्ट आने दीजिए, यह स्पष्ट हो जाएगा कि मेरे साथ कौन बाहरी लोग गए थे। झूठी बातें टिकती नहीं हैं।

विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने रह गए हैं। आप प्रदेश भर का दौरा कर उम्मीदवारों की संभावना तलाश रहे थे, लेकिन बीच में ही आपको हटा दिया गया। अचानक आपके प्रति केंद्रीय नेतृत्व के इस रुख का क्या कारण हो सकता है? 

- यह तो केंद्रीय नेतृत्व का फैसला है। नेतृत्व ने कुछ अच्छा सोचा होगा। हमने अपने स्तर पर कांग्रेस को मजबूत करने का प्रयास किया। उन सभी स्थानों पर पहुंचने और लोगों से जुड़ने का प्रयास किया, जहां आम जन एवं कांग्रेस कार्यकर्ता जुर्म-ज्यादती के शिकार हुए थे। लोगों से मिलकर ही तो पार्टी बड़ी होती है। वही मैं कर रहा था।

यह भी कहा जा रहा है कि गठबंधन को लेकर आपके कुछ बयानों से समाजवादी पार्टी असहज महसूस कर रही थी। सपा से बातचीत का माहौल बनाने के लिए आपको अध्यक्ष पद से हटाया गया?

- मैं ऐसा नहीं मानता। मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया जो सपा के साथ गठबंधन बनाने में बाधक हो। हां, सीट मांगना या कार्यकर्ताओं की बात रखना कोई विरोध नहीं है। समाजवादी पार्टी से मेरा मनमुटाव जैसा संबंध नहीं रहा। अध्यक्ष के रूप में कार्यकर्ताओं की बात रखना मेरा कर्तव्य था।

क्या पद से हटाने के पूर्व या बाद में राहुल गांधी ने आपको किसी पद पर समायोजित करने का कोई संकेत दिया?

-एक सप्ताह पूर्व राहुल गांधी से मेरी मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि हमारा अगला लक्ष्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने का है। हम सबको उसके लिए जुटना है। हम उनके संदेश को आदेश मानकर काम कर रहे हैं। जहां तक समायोजन की बात है तो नेतृत्व जो भी दायित्व देगा उसे निभाऊंगा। फिलहाल, मैं अपने विधानसभा क्षेत्र पिंडरा (वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के एक सीट) पर फोकस कर रहा हूं। यह मेरी कर्मभूमि है।

लेकिन अब तो आप एक सीट पर सिमट गए। पहले माना जा रहा था कि आप के नेतृत्व में ही प्रदेश में कांग्रेस का टिकट बंटेगा। जिन कार्यकर्ताओं को आपने टिकट का भरोसा दिया था उनका क्या होगा?

-पिंडरा में तो मैं हमेशा रहता हूं। इसे एक सीट पर सिमट जाना कहना उचित नहीं होगा। किस सीट पर टिकट किसे देना है, यह नेतृत्व तय करता है। प्रदेश अध्यक्ष का काम फीडबैक देने का होता है। जितना हो सकता है हमने किया। अब हम नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा को उन कार्यकर्ताओं की सूची सौंप देंगे जिन्होंने पार्टी के लिए कड़ी मेहनत की है और जो वास्तव में टिकट पाने लायक हैं। आगे पार्टी तय करेगी।

क्या आप भी इस चर्चा से सहमत हैं कि आपकी तुलना में आराधना मिश्रा  सपा से तालमेल बनाने में अधिक सक्षम होंगी?

- वह एक नामी परिवार की हैं। उनके पिता प्रमोद तिवारी कांग्रेस के बड़े नेता हैं। उनके प्रभाव का लाभ पार्टी को जरूर मिलना चाहिए। जहां तक सपा से तालमेल बनाने में उनकी (आराधना मिश्रा ) कुशलता का प्रश्न है तो इसके बारे में क्या टिप्पणी करूं। मैं पहले भी कह चुका हूं कि सपा से गठबंधन को लेकर मेरा कोई मतभेद नहीं था। किसी भी दल से तालमेल अपने संगठन की जरूरत और कार्यकर्ताओं के सम्मान के आधार पर ही होता है।

प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद आपके भाजपा में शामिल होने की चर्चा भी खूब हो रही है। इसमें क्या सच्चाई है?

- (सवाल सुनते ही चेहरे पर तनाव आता है..पास में मौजूद लोगों की तरफ देखते हैं और फिर बोलने लगते हैं) ऐसी चर्चाएं वे लोग करतें हैं जिनके पास सोचने के लिए कुछ नहीं होता। मैने नरेन्द्र मोदी को टक्कर दी थी। भला मैं क्यों भाजपा में जाऊं।

हाल ही में जब आप बीमार पड़े थे तो प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट करके आपके स्वस्थ होने की कामना की थी। इसे किस रूप में देखते हैं?

- यह एक शिष्टाचार था। प्रधानमंत्री ने मेरे स्वस्थ होने की कामना कर बड़ा दिल दिखाया था। मैं उसके लिए आभारी हूं। राहुल गांधी ने भी एक्स पर पोस्ट किया था और लगातार कुशलक्षेम पूछते रहे। उसकी भी चर्चा होनी चाहिए।