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साइबर ठगी के हों श‍िकार तो 1930 पर तुरंत करें काल, वापस आ जाएंगे रुपये, बनारस का मामला बना नजीर

By Rakesh SrivastavaEdited By: Abhishek sharma
Published: Sun, 13 Sep 2026 02:55 PM (IST)

वाराणसी पुलिस की तत्परता से रामनगर के एक युवक को साइबर ठगी के शिकार होने के बाद उसके 97,250 रुपये ...और पढ़ें

साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें, वाराणसी पुलिस ने वापस दिलाए 97,250 रुपये।

साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें, वाराणसी पुलिस ने वापस दिलाए 97,250 रुपये।

HighLights

  1. वाराणसी पुलिस ने साइबर ठगी के 97,250 रुपये वापस दिलाए।

  2. पीड़ित ने तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की।

  3. रामनगर पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क की सक्रियता से मिली सफलता।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। डिजिटल युग में जहां साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं वाराणसी कमिश्नरेट की पुलिस अपनी तत्परता से जालसाजों के मंसूबों पर पानी फेर रही है। रामनगर पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क की सक्रियता के चलते साइबर ठगी के शिकार एक युवक को उसके 97,250 रुपये वापस मिल गए हैं। अपनी गाढ़ी कमाई वापस पाकर पीड़ित ने वाराणसी पुलिस का आभार व्यक्त किया है।

घटना के अनुसार, रामनगर थाना क्षेत्र के निवासी विकास यादव 1 जुलाई 2026 को साइबर जालसाजों का शिकार हो गए थे। शातिर ठगों ने उनके बैंक खाते से 97,250 रुपये उड़ा लिए। जैसे ही विकास को पैसे कटने का पता चला, उन्होंने बिना कोई देरी किए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराई। समय पर की गई इस सूझबूझ भरी शिकायत का परिणाम यह रहा कि ठगी गई पूरी रकम बैंक स्तर पर ही होल्ड हो गई।

पैसे होल्ड होने के बाद पीड़ित विकास यादव ने रामनगर थाने पहुंचकर प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा से मुलाकात की और अपनी पूरी समस्या बताई। मामले की गंभीरता को समझते हुए एसएचओ संजय मिश्रा ने त्वरित संज्ञान लेकर रामनगर थाने की साइबर हेल्प डेस्क टीम को मामले में लगाया। पुलिस टीम ने पीड़ित की सहायता करते हुए कानूनी प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया।

रामनगर पुलिस की इस कुशल और त्वरित पैरवी के परिणामस्वरूप, पीड़ित के खाते से कटे पूरे 97,250 रुपये सफलतापूर्वक उनके बैंक खाते में वापस आ गए। ठगी गई रकम वापस पाकर विकास यादव का चेहरा खुशी से खिल उठा। उन्होंने इस सराहनीय कार्य और त्वरित मदद के लिए प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा, साइबर हेल्प डेस्क टीम और पूरी वाराणसी पुलिस को धन्यवाद दिया है।

police

प्रभारी निरीक्षक रामनगर संजय मिश्रा ने अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तत्काल 1930 पर कॉल करें। शुरुआती "गोल्डन आवर" में की गई शिकायत से पैसे वापस मिलने की संभावना काफी अधिक होती है, जैसा कि विकास यादव के मामले में साबित हुआ।

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। वाराणसी पुलिस की तत्परता और सक्रियता ने एक बार फिर साबित किया है कि वे नागरिकों की सुरक्षा के प्रति कितने गंभीर हैं। साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच, पुलिस की यह पहल अन्य लोगों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

विकास यादव की कहानी न केवल एक सफल पुनर्प्राप्ति की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही समय पर की गई कार्रवाई से किसी भी संकट का सामना किया जा सकता है। वाराणसी पुलिस की इस पहल से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और वे साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहेंगे।