चंदौली, जेएनएन। लॉकडाउन में घर पहुंचने के लिए जद्दोजहद कर रहे श्रमिक भूख प्यास से अपना आपा  खो दे रहे। प्यास की ऐसी तड़प लगी कि श्रमिकों ने शनिवार को पीडीडीयू जंक्शन के प्लेटफार्म एक से पानी की बोतलें लूट ली। दस दिन से प्लेटफार्म पर पानी की हजारों बोतलें रखी थीं। जानकारी होते अधिकारियों में खलबली मच गई। डीआरएम पंकज सक्सेना व आरपीएफ कमांडेंट आशीष मिश्र आलाधिकारियों के साथ जंक्शन पर पहुंच गए। वरिष्ठ अधिकारियों ने वहां मौजूद रहकर श्रमिकों को पानी की बोतल व खाने के पैकेट का वितरण करवाया। इस कार्य के लिए स्काउट गाइड के छात्रों ने अपना योगदान दिया।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनल (मुंबई) से श्रमिकों को लेकर बेतिया (बिहार) जा रही स्पेशल ट्रेन सुबह 8.15 बजे जंक्शन पर पहुंची। प्लेटफार्म एक पर ट्रेन के रुकते ही पानी की बोतल देख दर्जनों श्रमिक टूट पड़े। पानी की बोतल उठाकर श्रमिक अपनी अपनी बोगी में लेकर चले गए। श्रमिक भूख प्यास से इतने व्याकुल थे कि प्लेटफार्म पर मौजूद सभी कार्यालयों का दरवाजा खोलकर भोजन की तलाश करने लगे। यहां तक श्रमिकों ने कम्युनिटी किचन को भी खोल दिया लेकिन उनके हाथ भोजन नहीं लगा। लगभग 15 मिनट तक श्रमिकों ने उत्पात मचाया। हालांकि श्रमिकों ने किसी तरह की तोडफ़ोड़ नहीं की। श्रमिकों की हालत को देख उन्हें रोक पाना भी मुश्किल था।

डीआरएम व कमांडेंट ने लिया जायजा

जंक्शन पर पानी की बोतलों की लूट होने से मंडल में खलबली मच गई। जानकारी हुई तो मंडल रेल प्रबंधक, एडीआरएम प्रथम राकेश रोशन, कमांडेंट, सीनियर डीपीओ अजीत कुमार, सीनियर डीसीएम रूपेश कुमार, सीनियर डीएमई श्रवण कुमार सहित अन्य आलाधिकारी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद जंक्शन पर पहुंची दूसरी श्रमिक स्पेशल ट्रेन के श्रमिकों को अपनी मौजूदगी में खाने के पैकेट व पानी की बोतलों का वितरण किया गया।

भाग खड़े हुए कार्मशियल व आइआरसीटीसी के कर्मचारी

पीडीडीयू मंडल के स्थानीय जंक्शन पर पहली बार हुई पानी की बोतलों की लूट ने हर किसी को अचंभित कर दिया। उधर कामर्शियल विभाग व आईआरसीटीसी के कर्मचारी भाग खड़े हुए। हालांकि बाद में व्यवस्था को ठीक कराया गया। स्काउट व गाइड के छात्रों ने खाना बांटने का जिम्मा उठाया।

मूकदर्शक बने रहे अधिकारी, चिल्लाते रहे जवान

भूख व प्यास से व्याकुल श्रमिकों ने जब पानी की बोतलों पर धावा बोला तो स्टेशन पर मौजूद अधिकारी व कर्मचारी मूकदर्शक बने रहे। उन्हें समझ में ही नहीं आया कि क्या रहा है। उधर जीआरपी व आरपीएफ के जवान चिल्लाते रहे लेकिन श्रमिक 15 मिनट तक पानी की बोतलें ट्रेन में भरते रहे।

Posted By: Saurabh Chakravarty

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