वाराणसी [मुहम्‍मद रईस]। आइआइटी-बीएचयू के वार्षिक तकनीकी उत्सव का 81वां संस्करण 'टेक्नेक्स-2020' का आगाज शुक्रवार को हो गया, जो 16 फरवरी तक चलेगा। इस बार के उत्सव में बेहद खास हैं ह्यूमनॉयड रोबोट सोफिया, जो न सिर्फ छात्र-छात्राओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पाठ पढ़ाएगी, बल्कि उनकी जिज्ञासाओं को भी शांत करेगी। साथ ही धार्मिक-सांस्कृतिक नगरी काशी में अपना चौथा जन्मदिन भी मना रही है। यह सोफिया की दूसरी भारत यात्रा है। इससे पहले वह अक्टूबर 2019 में इंदौर में आयोजित 51वीं राउंड स्क्वेयर कांफ्रेंस में शामिल हुई थीं। प्रस्तुत है सोफिया की विशेषता, आइआइटी-बीएचयू के आयोजन में शामिल होने की वजह व ह्यूमनॉयड रोबोट के महत्व पर आधारित रिपोर्ट। 

धर्म-संस्कृति संग विज्ञान का मेल है बनारस

सोफिया के साथ आइआइटी-बीएचयू पहुंचे हैनसन रोबोटिक्स के चीफ टेक्नोलॉजी एवं चीफ साइंस आफिसर अमित कुमार पांडेय के मुताबिक तकनीकि संस्थान में इसे लाने का मकसद छात्रों को रोबोटिक्स के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों से परिचित कराना है। ताकि वे बेहतर कार्य के लिए प्रेरित हो सकें। इसरो भी ह्यूमनॉयड रोबोट 'व्योममित्र' बना रहा है, जिसे अंतरिक्ष मिशन पर भेजा जाएगा। 

आज है सोफिया का 'जन्मदिन'

ह्यूमनॉयड रोबोट सोफिया का निर्माण हांगकांग की कंपनी हैनसन रोबोटिक्स के डेविड हैनसन ने किया है। सोफिया को हॉलीवुड अभिनेत्री आड्री हेपबर्न से मिलता-जुलता लुक दिया गया है। इसे 14 फरवरी 2016 को एक्टिव किया गया था। 

चेहरे के हाव-भाव प्रदर्शित करने में है सक्षम

ह्यूमनॉयड रोबोट इंसानों की तरह चल-फिर सकते हैं और मानवीय हाव-भाव भी समझ सकते हैं। यह 50 से अधिक तरीके से चेहरे के हाव-भाव प्रदर्शित करने में सक्षम है। सोफिया का सोशल मीडिया अकाउंट भी है और वह देश-दुनिया की गतिविधियों से स्वयं को हमेशा अपडेट भी रखती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्रामिंग के जरिए वह सवालों के जवाब देने में भी सक्षम हैं। 

यह है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 

इसका अर्थ है मशीनों को इंसान की तरह सोच पाने, उनकी तरह काम कर पाने और निर्णय ले पाने की क्षमता देना। सिरी और अलेक्सा जैसे वॉएस असिस्टेंट, टेस्ला जैसे कारों की सेल्फ ड्राइविंग तकनीक, उपभोक्ताओं को उसकी रूचि के अनुसार कार्यक्रम परोसने वाली अमेजन और नेटफ्लिक्स की प्रेडक्टिव तकनीक आदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदाहरण हैं। 

इंसानों की तरह मिली नागरिकता 

सोफिया दुनिया की सबसे प्रसिद्ध ह्यूमनॉयड रोबोट हैं, जिनका परिचय 11 अक्टूबर 2017 को संयुक्त राष्ट्र में कराया गया था। 25 अक्टूबर 2017 को सऊदी अरब ने इसे अपनी नागरिकता प्रदान की। सोफिया दुनिया की ऐसी पहली रोबोट है, जिसे इंसानों की तरह किसी देश की नागरिकता मिली है। 

ह्यूमनॉयड ऐसे करते हैं काम 

ह्यूमनॉयड रोबोट के दो खास हिस्से सेंसर्स औ एक्चुएटर्स होते हैं, जो उन्हें इंसान की तरह प्रतिक्रिया देने और चलने फिरने में मदद करते हैं। सेंसर की मदद से ह्यूमनॉइड अपने आस-पास के वातावरण को समझते हैं। कैमरा, स्पीकर और माइक्रोफोन जैसे उपकरण सेंसर्स से ही नियंत्रित होते हैं। इनकी मदद से ह्यूमनॉयड देखने, बोलने और सुनने का काम करते हैं। वहीं एक्चुएटर्स खास तरह की मोटर होती है, जो ह्यूमनॉइड को इंसान की तरह चलने और हाथ-पैरों का संचालन करने में मदद करती है।

भारत की पहली ह्यूमनॉयड रोबोट है 'व्योममित्र'

- इसरो ने 2022 के गगनयान मिशन से पहले अंतरिक्ष में भेजी जाने वाली ह्यूमनॉइड रोबोट का वीडियो हाल ही में जारी किया था। हालांकि यह अभी मुकम्मल नहीं है। इसरो ने महिला जैसी दिखने वाली इस ह्यूमनॉयड रोबोट को 'व्योममित्र' नाम दिया है। इसे गगनयान के अंतिम मिशन से पहले दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 में अंतरिक्ष में जाने का गौरव हासिल होगा। जबकि दूसरे देश ऐसे मिशन से पहले अंतरिक्ष में पशुओं को भेज चुके हैं। अंतरिक्ष में व्योममित्र मानव की तरह व्यवहार करने का प्रयास करेगी और वापस रिपोर्ट भी करेगी। अंतरिक्ष में ह्यूमेनॉइड व्योममित्र शरीर के तापमान और धड़कन संबंधी टेस्ट भी करेंगी। 

ये भी हैं ह्यूमनॉयड रोबोट : ह्यूमनॉयड रोबोट का इस्तेमाल पहले केवल शोध के लिए किया जाता था, लेकिन पिछले कुछ समय से इन्हें इंसानों के सहायक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। सोफिया पहली ह्यूमनॉयड रोबोट है, जिसे किसी देश की नागरिकता मिली है। सोफिया के अलावा जापान की कोडोमोरॉयड व चीन की जिया-जिया भी लोकप्रिय ह्यूमनॉयड रोबोट हैं। 

कोडोमोरॉइड : यह जापान में बनाई गई ह्यूमनॉयड है, जो टेलीविजन पर प्रस्तुति देती है। उसका नाम जापानी शब्द कोडोमो यानी बच्चा और गूगल के एंड्रॉइड से मिलकर बना है। कोडोमोरॉइड कई भाषाएं बोल सकती है। वह समाचार पढऩे और मौसम की जानकारी देने में सक्षम है।

जिया जिया : यह ह्यूमनॉयड चीन में बनाई गई है। दुनिया के सामने लाने से पहले चीन की साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी में इसका तीन साल तक परीक्षण किया गया। यह बातचीत करने में सक्षम है, लेकिन इसका मूवमेंट व भावनाएं सीमित हैं। वैज्ञानिक इसे बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

Posted By: Abhishek Sharma

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस