हुमा कुरैशी ने कान्स फिल्म फेस्टिवल में बनारसी साड़ी पहनकर बिखेरा जलवा, इंस्टाग्राम पर साझा की शानदार तस्वीर
अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने कान्स फिल्म महोत्सव में पारंपरिक बनारसी साड़ी पहनकर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। उनकी हल्के बैंगनी ...और पढ़ें

कान्स में हुमा कुरैशी का बनारसी साड़ी में जलवा भारतीय शिल्प को मिला वैश्विक मंच।
HighLights
हुमा कुरैशी ने कान्स में पहनी पारंपरिक बनारसी साड़ी।
भारतीय संस्कृति और बनारसी शिल्प को वैश्विक पहचान मिली।
अभिनेत्री की साड़ी की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर हुईं वायरल।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। ख्यात अभिनेत्री हुमा कुरैशी इन दिनों कान्स फिल्म महोत्सव में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। कई भारतीय अभिनेत्रियों के बीच उनकी वहां पर मौजूदगी इसलि भी शानदार बन गई क्योंकि उन्होंने विदेशी आउटफिट की जगह भारतीय साड़ी और उस पर खांटी बनारसी साड़ी पहनकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
हुमा द्वारा पारंपरिक बनारसी साड़ी पहनने की खबर उनके इंस्टाग्राम पर साझा करने के बाद वायरल हो रही है। बनारसी साड़ी तो वैसे वैश्विक स्तर पर जानी जाती है लेकिन फैशन और सिनेमा के इस वैश्विक मंच पर बनारसी शिल्प कौशल की रौनक ने पूरा माहौल बनारस मय कर दिया है।

39 वर्षीय अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर कई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वह काफी बारीक सोने की जरी की कढ़ाई वाली हल्के बैंगनी रंग की साड़ी में नजर आ रही हैं। उन्होंने सोने के आभूषण और कम से कम मेकअप के साथ अपने लुक को साझा किया, जिससे पारंपरिक सुंदरता और समकालीन भारतीय और उस पर भी बनारसी शैली का मिश्रण देखने को मिला।
इस पहनावे पर अपने विचार इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए हुए कुरैशी ने लिखा है, "बनारस के घाटों से लेकर फ्रेंच रिवेरा तक।" पोशाक के महत्व पर विचार करते हुए, उन्होंने आगे कहा, "ऐसे बुने हुए कपड़े पहनने में कुछ अविश्वसनीय रूप से खास बात है जो ऐसा महसूस कराता है जैसे उसने समय के साथ जीवन जिया हो।" "मुझे सबसे ज्यादा जो पसंद है, वह यह है कि यह साड़ी एक साथ दो दुनिया को समेटे हुए है।

कान्स में इस पोशाक को पहनने के बारे में बात करते हुए, कुरैशी ने कहा, "कान्स में, सिनेमा और कहानी कहने के माहौल से घिरे होने के कारण, कुछ ऐसा पहनना जो खुद एक कहानी कहता हो, काफी अवास्तविक सा लगता है।" हुमा कुरैशी ने अपनी साड़ी की तस्वीर इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए बताया कि उन्होंने बनारस के घाटों से लेकर फ्रेंच रिवेरा तक का सफर तय किया है।
ऐसे कपड़े पहनने में कुछ बेहद खास बात है जो मानो समय के साथ जीवंत हो उठे हों। उन्होंने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है कि ये दो दुनिया को एक साथ समेटे हुए हैं। एक पारंपरिक बनारसी बुनाई की पुरानी यादें भी हैं।
हुमा कुरैशी का यह प्रयास न केवल भारतीय संस्कृति और बनारसी साड़ी को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे पारंपरिक वस्त्र आधुनिकता के साथ सामंजस्य स्थापित कर सकते हैं। उनकी इस साड़ी ने न केवल बनारसी शिल्प कौशल को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि भारतीय फैशन और उसमें भी बनारसी साड़ी का एक अद्वितीय स्थान है, जो विश्व स्तर पर सराहा जा रहा है।

उन्होंने अपने पोस्ट में बाकायदा बनारस के उस कला को बनाने वाले को क्रेडिट भी दिया है। अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने कान्स फिल्म महोत्सव में अपने इस अद्वितीय पहनावे के माध्यम से भारतीय संस्कृति और कला को एक नई पहचान दी है। उनकी यह उपस्थिति न केवल उनके व्यक्तिगत फैशन सेंस को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि बनारसी शिल्प कौशल को कैसे एक नए रूप में वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा सकता है।
हुमा कुरैशी का यह प्रयास बनारसी साड़ी को एक नई पहचान देने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनकी इस उपस्थिति ने न केवल दर्शकों का ध्यान खींचा, बल्कि बनारसी साड़ियों को एक नई दिशा दी भी है।
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