वाराणसी, जेएनएन। बाधाएं कब तक बांधेंगी की थीम पर आधारित बीएचयू के अहिवासी कला वीथिका की दीवारों पर लगीं चित्रकलाओं में कहीं महिला की ममता दिखी, तो किसी में उसकी ताकत, कहीं वह समाज को आगे का रास्ता दिखा रही है, तो कहीं खुद आगे चलकर दूसरों का आदर्श बन रही है। दृश्य कला संकाय द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य पर नारी के विविध स्वरूपों पर ऐसी ही सौ चित्रकलाएं लोगों के अवलोकन के लिए लगाई गईं हैं। इसके अलावा दो दिवसीय संगोष्ठी व  'बाधाओं से निकले हम, सूरज से चमके हम' की थीम पर आयोजित कार्यशाला में लाइव पेंटिंग, पोस्टर, कोलाज, इंस्टालेशन बनाने के साथ ही कविता पाठ व समूह चर्चाएं भी हुईं।

रूढिय़ों को तोड़कर आकाश को तलाशा

दृश्यकला संकाय के चित्रकला विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. उत्तमा दीक्षित के संयोजन में हो रहे इस कार्यशाला में बीएचयू के दृश्य कला विभाग सहित काशी विद्यापीठ का लालित कला विभाग व धीरेंद्र महिला पीजी कालेज के इंस्टीट्यूट आफ फाइन आर्ट्स के कलाकार भी उपस्थित रहे। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डा. नीरजा माधव ने मध्यकाल व आधुनिक काल में महिलाओं की स्थिति का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया। कवयित्री डा. रचना शर्मा ने कहा कि आज महिलाओं ने रूढिय़ों को तोड़कर नए आकाश को तलाशा है। इस मौके पर कवयित्री व लेखिका डा. सविता सौरभ, शिक्षाविद् डा. सीमा तिवारी ने  डा. शांति स्वरूप सिन्हा, संकाय प्रमुख प्रो. डीपी मोहंती, प्रो. हीरालाल प्रजापति, प्रो. मंजुल चतुर्वेदी, डा. एस प्रणाम, ललित मोहन, सची उपाध्याय व प्रो. विनोद सहित कई छात्र-छात्रा मौजूद थे।

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