वाराणसी,जेएनएन। हिंदी के 12 मासों में स्नान दान के निमित्त तीन माह प्रमुख माने गए हैं। इनमें कार्तिक, माघ व वैशाख शामिल हैं। वैशाख स्नान चैत्र पूर्णिमा से शुरू होकर वैशाख पूर्णिमा तक चलता है। चैत्र पूर्णिमा उदया तिथि अनुसार शुक्रवार को पड़ रही है, इस दिन से एक मासीय स्नान-दान, यम-नियम का प्रारंभ हो जाएगा जो 18 मई तक चलेगा। सुबह से ही आस्‍थावानों का रेला गंगा की ओर उमड़ा तो स्‍नानार्थियों ने भी पुण्‍य की डुबकी लगाने के बाद दान पुण्‍य की बेला में दायित्‍वों का निर्वाह किया। 

ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार वैशाख मास में इस समय में प्रात: गंगा स्नान की विशेष महत्ता होती है। मान्यता है कि एक मास तक चलने वाले स्नान-दान, यम-नियम का पालन कर भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में समस्त पापों से निवृत्ति के साथ सभी मनोकामना पूरी होती है। अंत में वैकुंठ धाम में जगह मिलती है।

 

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