वाराणसी, जेएनएन। शहर में सुबह नौ बजे के करीब बादलों ने अचानक बरसात के सात ओलों की जोरदार बौछार भी कर दी। इसकी वजह से सुबह लगा कि बारिश और बर्फ के स्‍वरुप ने काशी को मानो थोड़ी देर के लिए कश्‍मीर की वादी में तब्‍दील कर दिया हो। अचानक बूंदाबांदी के बीच जोरदार ओलावृष्टि होने से चारों ओर एक सफेद बर्फ की चादर जमीन पर फैल गई। चारों ओर बारिश और ओलों के वार से बचने का लोग जुगत करने लगे। हालांकि ओलावृष्टि का दौर दस से पंद्रह मिनट तक का ही रहा और बादल छंटने लगे।

बारिश संग ओलों की बरसात ने पूर्वांचल के कई जिलों में दस्‍तक दी है। वहीं शनिवार की तड़के भी बारिश के साथ ओले पड़े और आवाज से लोगाें की नींद में खलल भी पड़ी। वहीं सुबह नौ बजे के बाद अचानक काले बादलों ने आसमान में कब्‍जा जमाया और देखते ही देखते बारिश के साथ मटर के दाने से भी बड़े ओलों से जमीन में बर्फ की एक परत बिछ गई। चारों ओर सफेद ओलों की चादर से लगा मानो काशी में पूरी कश्‍मीर की वादी ही उमड़ पड़ी हो। बारिश और ओले की बौछार से बचने के लिए सड़क पर निकले लोग अचानक इधर उधर भागने लगे। इस आपाधापी में कई लोग ओलों की चपेट में आकर चोटिल भी हो गए।

वहीं ओलों की बरसात के बाद मौसम साफ होते ही लोगों ने राहत की सांस भी ली है। मौसम विज्ञानियों ने हालांकि ओले पड़ने की पूर्व में ही संभावना जता दी थी। वहीं कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ओलावृष्टि से पूर्वांचल के कई जिलों में फसलें प्रभावित हुई हैं। आधी रात के बाद से ही पूर्वांचल के अमूूमन सभी जिलों में ओलावृष्टि हुई अौर लोगों की सब्‍जी और तिलहनी फसलाें को इससे अधिक नुकसान हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अागे भी अगर बारिश हुई तो खेती को नुकसान हो सकता है। 

शहर में हालांकि इस दौरान कम ओलावृष्टि हुई मगर आंचलिक क्षेत्रों में काफी देर तक बारिश और ओलों के साथ तेज हवाओं का रुख रहा। कई जगह ओलों का आकार मटर के दानों से भी अधिक बड़ा होने की वजह से किसानों की फसल भी प्रभावित हुई। जबकि सरसों की कई जगहों पर फसल चौपट होने से किसानों की मेहनत पर पानी फ‍िर गया है। जबकि अन्‍य फसलें भी मामूली तौर पर प्रभावित हुई हैं। वहीं किसानों का मानना है कि आगे भी यही हाल रहा तो इस सीजन की फसल बचाना भी मुश्किल होगा। 

Posted By: Abhishek Sharma

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