कम उम्र में भी हो रहा हार्ट अटैक, ‘नो योर नंबर’ याद रखना महत्वपूर्ण, इस तरह बचेगी जान
कम उम्र में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों पर बीएचयू के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. विकास अग्रवाल ने चिंता ...और पढ़ें

कम उम्र में हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा: 'नो योर नंबर' से जानें बचाव के तरीके।
HighLights
कम उम्र में हार्ट अटैक के मुख्य कारण खराब जीवनशैली, तनाव।
बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल (नो योर नंबर) की नियमित जांच कराएं।
छाती दर्द, सांस फूलना जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से मिलें।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। हार्ट अटैक अब कम उम्र में देखा जा रहा है। ओपीडी में रोजाना 25 से 45 साल के उम्र में भी हार्ट अटैक के केस देखे जा रहे हैं। इसमें मुख्य वजह खराब रहन सहन, अनियमित दिनचर्या, तनाव और वायु प्रदूषण समेत कई और कारण हैं। इसका बचाव बहुत जरूरी है। इसके लिए आपको अपना नंबर (नो योर नंबर) बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रोल के जांच के नंबर पता होना चाहिए।
यह टेस्ट ह्रदय रोग विशेषज्ञ से मिलकर जरूर करा समय पर करा लें और उनको कंट्रोल में रखना चाहिए, क्योंकि यही तीन सबसे बड़े रिस्क हार्ट अटैक के रिस्क फैक्टर हैं। इसके अलावा धूम्रपान, तंबाकू, अल्कोहल एक बड़ा कारण है। हार्ट अटैक के लक्षण को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।
इसमें चेस्ट पेन, सांस फूलना, अत्यधिक उलझन को नजरंदाज कभी भी न करें। इस तरह के लक्षण मिलते ही तुरंत ह्रदय रोग विशेषज्ञ से मिलकर परामर्श लेें। हार्ट अटैक में टाइम बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर समय पर (गोल्डेन आवर) डाक्टर के पास पहुंच गए तो हार्ट कम क्षतिग्रस्त होता है और इलाज के रिजल्ट बहुत अच्छे होते है।
दैनिक जागरण के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘हेलो जागरण’ में बुधवार को आइएमएस बीएचयू के कार्डियोलाजी विभाग के एचओडी ह्रदय रोग विशेषज्ञ प्रो. डा. विकास अग्रवाल ने पाठकों से बात की। उन्होंने सीने में दर्द या बेचैनी (एंजाइना), सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान और कमजोरी, पैरों या टखनों में सूजन, अनियमित दिल की धड़कन आदि की जानकारी दी। साथ ही मौसमी बीमारी के बारे में बचाव व उपचार के बारे में भी बताया।
मेरी उम्र 73 वर्ष है। कई सालों से सांस बहुत फूल रहा है और चक्कर आने लगता है क्या करें? सुशीला (महमूरगंज)
- हार्ट और उम्र की वजह से यह दिक्कत हो सकती है। ईसीजी, एक्सरे और ईको की जांच कराने की आवश्यकता है। इनकी रिपोर्ट देखने के बाद सीटी एंजियोग्राफी,(एंजियोग्राफी) की आवश्यकता लगी तो उसको भी कराके आगे का इलाज किया जाएगा।
एलडीएल कितना रखना जरूरी है? सुधीर कुमार राय (महमूरगंज)
-हर वयस्क का एलडीएल कोलेस्ट्राल 100 व मधुमेह से ग्रसित मरीजों 70 से कम रखना चाहिए।
पेशमेकर लगे 20 साल हो गया है कुछ साल बाद बैट्री रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ेगी, क्या कोई ऐसा पेशमेकर आया है जिसमें बैट्री अपने आप चार्ज हो जाएगी? त्रिभुवन नारायण सिंह (बाबतपुर)
- ऐसा पेशमेकर अभी नहीं आया है। इसके लिए शोध किया जा रहा है। आगे चलकर कुछ नया हो सकता है।
मेरी उम्र 58 वर्ष है। हार्ट बीट ज्यादा धड़क रहा है चेस्ट में पेन हो रहा है क्या करें? ओपी मिश्रा (जंघई जौनपुर)
- बीपी मशीन से एक सप्ताह तक नियमित रूप से जांच करते रहें और उसकी चार्ट बना लीजिए। साथ ही हार्ट रेट पता करने के लिए ईसीजी भी करा लीजिए। वहीं ईसीजी की नियमित मानीटरिंग के लिए होल्टर मशीन भी लगाया जाता है। बीपी नार्मल होगा तो धड़कन अपने आप सही हो जाएगी। अधिक बीपी का इलाज जरूरी होता है। बीपी का बुरा असर हार्ट, आंख, किडनी, ब्रेन में होता है। इसलिए बीपी कंट्रोल करना बहुत जरूरी है।
मेरी उम्र 19 वर्ष है। हार्ट की समस्या लग रही थी। इसीजी कराएं है आगे क्या करें? सुनील अग्रवाल (बड़ी गैबी)
- ईसीजी में अगर कुछ गड़बड़ी लग रही है तो आगे इसमें छाती का एक्सरे और हार्ट का ईको कार्डियोग्राम जांच कराया जा सकता है। रिपोर्ट के आधार पर आगे का इलाज कराया जा सकता है।
एसीडीटी बहुत बनती है गले में खराश है क्या करें? शीला दीक्षित (महमूरगंज)
-यह हार्ट की समस्या नहीं लगती है। हार्ट की बीमारी को रूलआवट करने के लिए एक ईसीजी करा सकती हैं। इसके अलावा पेट के डाक्टर से भी मिलकर इलाज कराएं। यह समस्या जीईआरडी की हो सकती है।
छल्ला पड़ा है और खुजली की समस्या हो रही है क्या दवा से हो रहा है? रविकांत मिश्रा (जयरामपुर)
- दवा से इस तरह की संभावना नहीं होती है। चर्मरोग विशेषज्ञ से मिलकर इलाज कराएं।
मेरी उम्र 65 वर्ष है। बीपी व शुगर की समस्या नहीं है। मेरे चेस्ट के ऊपर बहुत दर्द हो रहा है क्या करें? कोमल सेठ (महमूरगंज)
- हार्ट की संभावना नहीं लग रही है। हार्ट का ब्लाकेज पता करने के लिए ईसीजी करा लीजिए। इसके बाद ही सही जानकारी का पता चल सकेगा।
मेरी उम्र 50 साल है। पसीना और घबराहट की समस्या है। कई तरह की जांच भी करा लिए है क्या अब करें? महमूद आलम (छित्तूपुर)
- घबराने की आवश्यकता नहीं है। इसीजी और ईको सही है तो एक ट्रेडमिल टेस्ट करा सकते हैं। एक बार ह्रदय रोग विभाग में मिलकर परामर्श ले लीजिए।
