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ज्ञानवापी में मंदिर बनाने और हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने के मामले की सुनवाई 23 सितंबर को

By Amarendra TiwariEdited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 18 Sep 2026 05:08 PM (IST)

ज्ञानवापी में नए मंदिर और पूजा-पाठ के अधिकार से जुड़े 1991 के मुकदमे में आगे की कार्रवाई रोकने के लिए ...और पढ़ें

ज्ञानवापी मंदिर और पूजा अधिकार मामले की सुनवाई 23 सितंबर को होगी।

ज्ञानवापी मंदिर और पूजा अधिकार मामले की सुनवाई 23 सितंबर को होगी।

HighLights

  1. ज्ञानवापी के 1991 के मुकदमे की अगली सुनवाई 23 सितंबर को।

  2. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कार्यवाही रोकने की अर्जी दाखिल की।

  3. अर्जी में सुप्रीम कोर्ट और जिला जज के आदेशों का हवाला।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। ज्ञानवापी में नए मंदिर बनाने और हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने को लेकर वर्ष 1991 में दाखिल मुकदमे में अग्रिम कार्रवाई न करने की सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील तौहिद खान की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर अग्रिम सुनवाई के लिए 23 सितंबर को तिथि मुकर्रर कर दी।

लगभग 35 साल पुराने इस मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक कोई कार्यवाही न करने की उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से एक जनवरी 2026 को प्रार्थना पत्र दी गई है। इस प्रार्थना पत्र में जिला जज संजीव शुक्ला द्वारा ज्ञानवापी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में 15 व 16 दिसंबर 2025 को पारित आदेश का हवाला देते हुए उक्त मुकदमे में अग्रिम कार्यवाही अमल में लाने की अपील की गई है।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता तौहिद खान ने वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल एक रिट याचिका 1246/2020 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 12 दिसंबर 2024 को पारित आदेश में ज्ञानवापी से संबंधित लंबित मुकदमों में अगले आदेश तक कोई भी प्रभावी अंतरिम अथवा अंतिम आदेश पारित न करने का अधीनस्थ न्यायालयों को आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को दृष्टिगत रखते हुए ही बीते दिनों जिला जज ने ज्ञानवापी परिसर में सीलबंद ताला पर खराब हो चुके कपड़े बदलने की शासन के विशेष वकील राजेश मिश्र की प्रार्थना पत्र पर कोई नया आदेश पारित नहीं किया। इसी तरह दूसरे भी एक मामले में भी जिला जज द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई।

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी आपत्ति जता चुके हैं।इस दौरान वकील अनुष्का तिवारी ने तौहिद खान की प्रार्थना पत्र पर फिर से सुनवाई करने की अपील की है। शुक्रवार को इस प्रार्थना पत्र पर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी द्वारा लिखित आपत्ति प्रस्तुत की। इस आपत्ति में कहा गया है कि अनुष्का तिवारी उक्त मुकदमे में पक्षकार नहीं हैं।

इसलिए वकील तौहिद खान के प्रार्थना पत्र पर फिर से सुनवाई करने की अपील करने का उन्हें कोई विधिक अधिकार नहीं है। इस मुकदमे की कार्यवाही को अनावश्यक रुप से बाधित करने के लिए उनकी ओर से प्रार्थना पत्र दिया गया है जो कि पोषणीय नहीं है। ऐसे में यह निरस्त किए जाने योग्य है। इस आपत्ति की प्रति अनुष्का तिवारी को दी गई।