जागरण संवाददाता, वाराणसी : ज्ञानवापी प्रकरण में अपर मुख्य न्याययिक मजिस्ट्रेट (पंचम) की अदालत में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व एआइएमआइएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, उनके भाई अकबरूद्दीन ओवैसी समेत सात नामजद और दो हजार अज्ञात के खिलाफ दाखिल अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस मामले में अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। वकील हरिशंकर पांडेय की ओर दाखिल अर्जी में कहा गया है कि इनकी ओर से हिंदू जनभावना के खिलाफ लगातार अपमान जनक बयान दिये जा रहे हैं। इससे काशी के श्रद्धालु और समस्त भारत के लोग मर्माहत हैं। इनके खिलाफ कार्यवाही की जाए।

महज सात मिनट में तय हो गया मुकदमे का रुख

ज्ञानवापी शृंगार गौरी प्रकरण में जिला जज की अदालत में चल रहे मुकदमे का रुख क्या होगा यह महज सात मिनट में तय हो गया। जिला जज डा. अजय कृष्ण विश्वेश ने आदेश की जानकारी वादी व प्रतिवादी पक्ष को दी। मंगलवार को मुकदमे की सुनवाई दोपहर 2.30 बजे शुरू हुई। अन्य दिनों में लंच के तुरंत बाद दो बजे सुनवाई होती थी। वादी व प्रतिवादी पक्ष पहले ही अदालत में पहुंच चुका था। मुकदमे की पोषणीयता की पहले सुनवाई का आदेश मिलने के बाद वादी पक्ष ने एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट की नकल देने की बात अदालत के समक्ष रखी। इसके लिए मौखिक की बजाय लिखित निर्देश का आग्रह किया। जिला जज ने इसे स्वीकार करते हुए इसके लिए अलग से आदेश दिया। इसके साथ ही 2.37 बजे अदालत की कार्यवाही स्थगित हो गई। इसके पहले अदालत कक्ष को खाली कराकर पुलिस के पास मौजूद सूची में जिन लोगों का नाम था पुष्टि के बाद उन्हें प्रवेश दिया।

हमारी मांग थी कि पहले मुकदमे की पोषणीयता पर सुनवाई हो

हमारी मांग थी कि पहले मुकदमे की पोषणीयता पर सुनवाई हो। सुप्रीम कोर्ट का भी यही निर्देश था। अदालत की ओर से इसे स्वीकार किया गया है। यह बिल्कुल विधि सम्मत है। इसका हम स्वागत करते हैं।

अभय नाथ यादव, वकील प्रतिवादी पक्ष

अदालत ने पहले मुकदमे की पोषणीयता पर सुनवाई करने का निर्देश दिया है। अन्य प्रार्थना पत्र पर इसके बाद सुनवाई होगी। एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट पर भी आपत्ति का समय तय किया गया है। हम इसके लिए अपनी तैयारी कर रहे हैं।

विष्णु जैन, वकील वादी पक्ष

Edited By: Saurabh Chakravarty